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मोहन भागवत ने नेताओं पर ली चुटकी, कहा- 'सेवा करने वाले लोग बड़ी मात्रा में दिखते हैं तो हम समझ जाते हैं कि चुनाव पास हैं'

 Reported By: Yogendra Tiwari Edited By: Shakti Singh
 Published : Mar 22, 2026 11:19 pm IST,  Updated : Mar 22, 2026 11:19 pm IST

मोहन भागवत ने कहा कि सेवा कोई उपकार नहीं है। यह कर्तव्य है। सेवा करने पर हम खुद पवित्र होते हैं। सेवा के कारण मन शुद्ध होता है।

Mohan Bhagwat- India TV Hindi
मोहन भागवत Image Source : PTI

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि कई बार सेवा करने वाले लोग हमें बड़ी मात्रा में दिखते हैं, तब हम समझते हैं कि आसपास कोई चुनाव है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिताजी के नाम पर नागपुर में गंगाधर राव फडणवीस मेमोरियल डायग्नोस्टिक सेंटर शुरू किया गया। इसी कार्यक्रम में संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा कि हमारे यहां सेवा शब्द की एक कल्पना है, सेवा यह कोई उपकार नहीं है, सेवा करना कर्तव्य है।

सरसंघचालक ने कहा, "जब हम सेवा करते हैं, तब हम खुद पवित्र होते है। क्योंकि इंसान का मन प्राकृतिक दृष्टि से कई प्रकार के विकारों से बुरे-अच्छे विचारों से भरा होता है। सेवा के कारण मन शुद्ध होता है, क्योंकि जब इंसान खुद को भूल कर सेवा करता है, उसे ही सेवा कहा जाता है।

मजबूरी के कारण भी सेवा होती है

मोहन भागवत ने कहा, "कई बार सेवा करने वाले लोग हमें बड़ी मात्रा में दिखते हैं, तब हम समझते हैं कि आसपास कोई चुनाव है। उस कारण कई लोग सेवा में जुड़ जाते हैं, लेकिन उनमें से कितने लोग चुनाव होने के बाद और चुनाव जीतने के बाद भी दिखाई देते है? सेवा के पिछे स्वार्थ भी एक प्रेरणा होती है, उससे लोगों का भला ही हो ऐसा नहीं है। वह टिकाऊ होगी ही ऐसा नहीं है, क्योंकि स्वार्थ पूरा होने पर लोग काम छोड़ देते हैं। डर भी सेवा के पीछे एक कारण होता है। ऐसी भी सेवा होती है, मजबूरी के कारण भी सेवा होती है।

2024 में भी कही थी यह बात

मोहन भागवत ने 20254 लोकसभा चुनाव के बाद भी ऐसी ही बात कही थी। उन्होंने नागपुर में कहा था कि  "सच्चा सेवक अहंकारी नहीं होता।" उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जब चुनाव आते हैं, तो सेवा करने वाले लोग अचानक ज्यादा दिखाई देने लगते हैं, प्रचार बढ़ जाता है, लेकिन असली सेवा निरंतर और बिना दिखावे की होनी चाहिए। चुनाव खत्म होने पर वे गायब हो जाते हैं, जो सच्ची सेवा नहीं है।

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