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उत्तर प्रदेश में उपद्रवियों पर नकेल के लिए योगी सरकार लाई रिकवरी अध्यादेश

 Reported By: IANS
 Published : Mar 14, 2020 07:55 am IST,  Updated : Mar 14, 2020 07:55 am IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार की शाम कैबिनेट की बैठक में धरना, प्रदर्शन और बंद के नाम पर सार्वजनिक और निजी संपत्ति को क्षति पहुंचाने वाले उपद्रवियों से नुकसान की भरपाई का अध्यादेश पारित किया गया।

उत्तर प्रदेश में उपद्रवियों पर नकेल के लिए योगी सरकार लाई रिकवरी अध्यादेश- India TV Hindi
उत्तर प्रदेश में उपद्रवियों पर नकेल के लिए योगी सरकार लाई रिकवरी अध्यादेश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार की शाम कैबिनेट की बैठक में धरना, प्रदर्शन और बंद के नाम पर सार्वजनिक और निजी संपत्ति को क्षति पहुंचाने वाले उपद्रवियों से नुकसान की भरपाई का अध्यादेश पारित किया गया। अब उत्तर प्रदेश रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश 2020 के तहत प्रदर्शन के नाम पर आगजनी और तोड़फोड़ के दोषी व्यक्तियों से वसूली की जाएगी।

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सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह और वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने लोकभवन में पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश में राजनीतिक धरना, प्रदर्शन, बंद और हड़ताल के दौरान उपद्रवियों द्वारा सरकारी एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है। इसके निवारण के लिए कड़े कानून की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे प्रदर्शनों की वीडियोग्राफी, विवेचना एवं क्षतिपूर्ति के लिए दावा अधिकरण की स्थापना के निर्देश दिए थे। उसी संबंध में आज यह अध्यादेश कैबिनेट में लाया गया, जो सर्वसम्मति से पारित हुआ। बहुत जल्द ही इसकी नियमावली भी आएगी।

खन्ना ने अध्यादेश के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। उन्होंने इतना कहा कि जल्द ही नियमावली बनेगी जिसमें सारी चीजें स्पष्ट की जाएंगी। इस सवाल पर कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लखनऊ में लगे कथित उपद्रवियों की तस्वीर वाले पोस्टर 16 मार्च तक हटाने के आदेश दिये हैं, ऐसे में क्या यह नियमावली उससे पहले बन जाएगी, खन्ना ने कहा ''नियमावली 16 तक कैसे आ सकती है। वह भी कैबिनेट से पास होती है।'' 

गौरतलब है कि लखनऊ जिला प्रशासन ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ पिछले साल 19 दिसम्बर को राजधानी में उग्र प्रदर्शन के मामले में आरोपी 57 लोगों की तस्वीर और निजी जानकारी वाले होर्डिंग जगह—जगह लगवाये हैं। उनमें से कई को सुबूतों के अभाव में जमानत मिल चुकी है। 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इसका स्वत: संज्ञान लिया था और इसे निजता का हनन करार देते हुए सरकार को 16 मार्च तक होर्डिंग हटाने के आदेश दिये थे। राज्य सरकार ने इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने सरकार से पूछा कि आखिर किस कानून के तहत उसने वे होर्डिंग लगवाये हैं। मामले की सुनवाई अगले हफ्ते होगी। 

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