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अमरनाथ यात्रा से पहले संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर हिरासत में, फेस रिकग्निशन सिस्टम से पकड़ा गया

 Reported By: Manzoor Mir Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jun 19, 2025 10:45 pm IST,  Updated : Jun 19, 2025 10:45 pm IST

अमरनाथ यात्रा से पहले अनंतनाग के लंगनबल में फेस रिकग्निशन सिस्टम से एक संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर पकड़ा गया। उसके खिलाफ 2005 में मामला दर्ज था। इस हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था से यात्रा की सुरक्षा और भी मजबूत मानी जा रही है।

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फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम से पकड़ा गया संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर। Image Source : INDIA TV

श्रीनगर: अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से एक संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) को हिरासत में लिया है। यह हिरासत पहलगाम के पास लंगनबल नाके पर गुरुवार शाम करीब 5 बजे हुई। इस घटना ने यात्रा की सुरक्षा के लिए किए गए हाई-टेक इंतजामों की ताकत को दिखाया है। पुलिस के मुताबिक, पकड़ा गया व्यक्ति सीर हमदानी का रहने वाला है और पेशे से बढ़ई है। उसके खिलाफ 2005 में एक FIR दर्ज है।

सिस्टम ने चेहरा पहचान कर बजाया अलार्म

लंगनबल नाके पर लगे फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम ने उसका चेहरा पहचाना और तुरंत अलर्ट जारी किया। इसके बाद अनंतनाग पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पहलगाम पुलिस स्टेशन में पूछताछ शुरू कर दी। कश्मीर में ओवरग्राउंड वर्कर उन लोगों को कहा जाता है जो आम नागरिक होने के बावजूद आतंकवादियों के लिए रेकी या जानकारी जुटाने जैसे काम करते हैं। अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2025 से शुरू होकर 9 अगस्त 2025 तक चलेगी। प्रशासन ने यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं का भी इंतजाम किया है, ताकि यह तीर्थयात्रा सुरक्षित और सुगम हो।

अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

बता दें कि 3 जुलाई से शुरू होने वाली 38 दिन की अमरनाथ यात्रा के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए हैं। इस बार यात्रा के दोनों मार्गों यानी कि पहलगाम (48 किमी) और बालटाल (14 किमी) पर फेस रिकॉग्निशन सिस्टम लगाए गए हैं। इन कैमरों में आतंकियों और संदिग्धों की तस्वीरें पहले से फीड की गई हैं। जैसे ही कोई ब्लैकलिस्टेड व्यक्ति कैमरे के सामने आता है, सिस्टम में हूटर बजता है और सुरक्षाबल तुरंत कार्रवाई करते हैं। इसके अलावा, पूरे रास्ते पर CCTV सर्विलांस, RFID टैग्स और अतिरिक्त नाके भी लगाए गए हैं।

अमरनाथ यात्रा में क्यों जरूरी है सख्त सुरक्षा?

अमरनाथ यात्रा पहले भी आतंकी हमलों का निशाना रही है। साल 2000 में नुनवान बेस कैंप पर हुए हमले में 32 लोग और 2001 में शेषनाग कैंप पर 13 लोग मारे गए थे। हाल ही में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत ने प्रशासन को और सतर्क कर दिया है। इसीलिए इस बार हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के साथ-साथ AI आधारित तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

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