जम्मू कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने गांदरबल एनकाउंटर के जांच के आदेश दिए हैं। इस आदेश में सेंट्रल कश्मीर के गंदेरबल जिले के अरहामा इलाके में एक एनकाउंटर में एक कथित आतंकवादी के मारे जाने की पूरी और निष्पक्ष मजिस्ट्रेट जांच की बात कही गई है। सेना के साथ कथित मुठभेड़ में 29 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई थी। इस एनकाउंटर पर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने सवाल उठाए थे। उमर अब्दुल्ला ने एक पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की।
श्रीनगर के बाहरी इलाके में स्थित अरहामा गांव में रात भर चले अभियान के दौरान सेना द्वारा एक स्थानीय आतंकवादी को मार गिराए जाने के दावे के एक दिन बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी आधिकारिक बयान पर मुख्यमंत्री द्वारा जताई गयी शंका का समर्थन किया।
एक्स पर की जांच की मांग
अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "मेरा मानना है कि परिवार के दावे को सिरे से खारिज नहीं किया जाना चाहिए। कम से कम इस घटना की पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए और सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा, "जांच की घोषणा में देरी करने का कोई भी प्रयास केवल विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाएगा और यह किसी के भी हित में नहीं है।"
रुहुल्लाह मेहदी ने भी जांच की मांग की
लोकसभा सदस्य आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने भी समयबद्ध और स्वतंत्र जांच की मांग में सीएम अब्दुल्ला का साथ दिया। श्रीनगर से लोकसभा सदस्य ने 'एक्स' पर कहा, "गांदरबल मुठभेड़ में मारे गए राशिद अहमद मुगल के परिवार का कहना है कि वह एक निर्दोष नागरिक था और उसका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं था। उसके कपड़े भी बदले गए थे। सेना उसकी पहचान उजागर करने से इनकार कर रही है।" उन्होंने कहा कि परिवार द्वारा लगाए गए आरोप "बेहद गंभीर" हैं और पुलिस की चुप्पी "अस्वीकार्य" है।
महबूबा मुफ्ती ने सीएम का समर्थन किया
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी उमर अब्दुल्ला की बात का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि सेना के आधिकारिक बयान में विसंगतियां हैं। उन्होंने कहा, "सेना ने पहले कहा कि वह एक विदेशी आतंकवादी था, फिर उसने कहा कि वह आतंकवाद से जुड़ा एक स्थानीय आतंकवादी था।" उन्होंने उन खबरों का हवाला दिया जिनमें कहा गया था कि मुगल वास्तव में एक अनाथ था जो एक गैर सरकारी संगठन चलाता था। महबूबा ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "उसका शव परिजनों को सौंपा तक नहीं गया। उसे बारामूला में दफनाया गया। हमारे युवाओं के साथ यही हो रहा है।"
पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल
खबरों के मुताबिक, राशिद के परिजनों ने बताया कि वह स्थानीय ग्रामीणों को बैंक ऋण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए फॉर्म भरने में मदद करने के लिए एक संस्थान चलाता था। ये आरोप उस दिन सामने आए जब उपराज्यपाल के प्रशासन ने पुलिस विभाग में बड़े फेरबदल के तहत गांदरबल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) खलील अहमद पोसवाल सहित 82 अधिकारियों का तबादला किया। तीस अप्रैल को सेवानिवृत्त होने वाले पोसवाल का तबादला 12वीं इंडिया रिजर्व बटालियन में कमांडेंट के रूप में कर दिया गया है। 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी सुधांशु धामा गांदरबल के नए एसएसपी बनाए गए हैं।
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