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खून चढ़ाने से 5 बच्चे हुए HIV पॉजिटिव, हाई कोर्ट में 1-1 करोड़ मुआवजे की मांग; जानिए पूरा मामला

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Apr 21, 2026 04:32 pm IST,  Updated : Apr 21, 2026 04:38 pm IST

चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक की लापरवाही की वजह से 5 मासूम बच्चे HIV संक्रमण का शिकार हो गए। अब इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : PTI

झारखंड के चाईबासा सदर अस्पताल से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के ब्लड बैंक की लापरवाही की वजह से 5 मासूम बच्चे HIV संक्रमण का शिकार हो गए। अब इस मामले को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना अक्टूबर 2025 की है। ये पांचों बच्चे (जिनकी उम्र 5 से 7 साल के बीच है) थैलेसीमिया मेजर नाम की बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी में बच्चों को हर महीने शरीर में नया खून चढ़वाना पड़ता है।

आरोप है कि चाईबासा सदर अस्पताल में इन बच्चों को जो खून चढ़ाया गया, वह पहले से संक्रमित था। लापरवाही का पता तब चला जब एक 7 साल के बच्चे की रिपोर्ट HIV पॉजिटिव आई, जबकि उसके माता-पिता दोनों की रिपोर्ट नेगेटिव थी। इससे यह साफ हो गया कि संक्रमण अस्पताल में खून चढ़ाने के दौरान ही फैला है।

कोर्ट से क्या मांगें की गई हैं?

बच्चों के परिवारों की ओर से वकील मोहम्मद शादाब अंसारी ने याचिका दायर कर ये मांगें रखी हैं-

  1. हर पीड़ित बच्चे को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  2. बच्चों को जीवनभर सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन और HIV की दवाइयां मुफ्त दी जाएं।
  3. बच्चों के लिए पोषक आहार, रहने के लिए पक्का मकान और उनके स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एक 'स्पेशल मेडिकल बोर्ड' बनाया जाए।
  4. समाज में होने वाले भेदभाव से बचाने के लिए परिवारों को काउंसलिंग और सुरक्षा दी जाए।

राज्य सरकार की आर्थिक मदद पर सवाल

झारखंड सरकार ने पहले ही इस मामले में कुछ अधिकारियों को निलंबित किया है और 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। हालांकि, याचिका में कहा गया है कि यह मदद "ऊंट के मुंह में जीरा" के समान है। 

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है। अस्पताल की इस गंभीर लापरवाही के लिए राज्य सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है।

बच्चों के परिवार की स्थिति

ये बच्चे आदिवासी और पिछड़े (OBC) समुदायों से हैं। इनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और बेहद गरीबी में जी रहे हैं। HIV संक्रमण की खबर फैलने के बाद इन परिवारों को सामाजिक बहिष्कार और घरों से निकाले जाने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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