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जीवन में सफल होने के लिए प्ररित करते हैं सद्गुरु के ये विचार, यहां पढ़ें उनके कोट्स

 Written By: Ritu Raj
 Published : Jul 04, 2026 02:29 pm IST,  Updated : Jul 04, 2026 02:29 pm IST

सद्गुरु जीवन की जटिल से जटिल समस्याओं को बहुत ही सरल और तार्किक उदाहरणों के साथ समझाते हैं। इतना ही नहीं वो जीवन में कामयाब होने के लिए भी लोगों को प्रेरित करते हैं। यहां पढ़ें सद्गुरु के मोटिवेशनल कोट्स।

सद्गुरु के प्रेरक विचार- India TV Hindi
सद्गुरु के प्रेरक विचार Image Source : ISHA FOUNDATION

सद्गुरु जग्गी वासुदेव आज के समय में दुनिया के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरुओं और मोटिवेशनल स्पीकर में से एक हैं। सोशल मीडिया से लेकर बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों तक उनके चाहने वालों की संख्या आज लाखों-करोड़ों में है। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे अध्यात्म को किसी पुराने ढर्रे या कर्मकांड से जोड़कर नहीं, बल्कि पूरी तरह से तार्किक और व्यावहारिक रूप से पेश करते हैं। यही वजह है कि आज का युवा वर्ग उनसे बहुत गहराई से जुड़ पाता है। सद्गुरु अपनी बातों, वीडियो और किताबों के जरिए लोगों को जीवन जीने का सही नजरिया सिखाते हैं। वे अक्सर कहते हैं कि "मानसिक तनाव या दुख बाहर की परिस्थितियों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होता है कि आप अपने भीतर की स्थिति को कैसे संभालते हैं। उनकी यह बात सीधे लोगों के दिलों को छूती है और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। उनके विचार प्रेरित भी करते हैं। ऐसे में यहां पढ़ें सद्गुरु के मोटिवेशनल कोट्स। 

  • जीवन तब सुंदर बनता है जब आप इसमें अपना सब कुछ झोंक देते हैं और इस बात की परवाह नहीं करते कि आपको क्या मिलता है और क्या नहीं। जीवन का आनंद खुद को अभिव्यक्त करने में है, भीख मांगने में नहीं।
  • जिसने अपने भीतर की निश्चलता को स्पर्श नहीं किया है, वह बाहर की हलचल में खो जाएगा।
  • आपके विचार केवल पुरानी जानकारी का ही दोहराव हैं। वहां वास्तव में कभी कुछ नया नहीं घट सकता।
  • कठिनाई एक परिस्थिति है जिससे हम गुजरते हैं। लेकिन दुख एक मानसिक स्थिति है जिसे हम खुद पैदा करते हैं।
  • अगर आपको लगता है कि आपका काम महत्वपूर्ण है, तो यह बहुत जरूरी है कि आप स्वयं पर काम करें।
  • आपको जो मिलता है, उससे आप केवल जीविका कमा सकते हैं। लेकिन जो आप देते हैं, केवल उसी से आप जीवन बनाते हैं।
  • अपनी यादों या कल्पना के कारण दुखी होने का मतलब है कि आप उस चीज से दुखी हैं जिसका अस्तित्व ही नहीं है।
  • अपने भीतर आप कैसे हैं, यह आपके द्वारा तय होना चाहिए। आध्यात्मिक होने का यही अर्थ है।
  • जीवन समावेशी है। केवल आपका मन विशेष बनने की कोशिश करता है।
  • जानकारी हासिल की जा सकती है। 'जानना' एक बोध है। लेकिन बुद्धिमानी आपको कमानी पड़ती है, और इसमें पूरा जीवन लग जाता है।
  • जब आपके भीतर मौजूद जीवन का स्रोत ही आपकी सर्वोच्च सत्ता बन जाता है, तब आपके आस-पास के लोगों की राय और उनके निष्कर्ष मायने नहीं रखते।
  • आजादी का अर्थ है अपने जीवन को स्वयं गढ़ने का सामर्थ्य होना, न कि इसे किसी और चीज के द्वारा तय होने देना।
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