लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत, महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, वकील, शिक्षाविद और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। उन्हें जनता द्वारा "लोकमान्य" की उपाधि दी गई थी। अंग्रेजी शासन उन्हें "भारतीय अशांति का जनक" मानता था, जबकि भारतीय जनता के लिए वे स्वराज की अलख जगाने वाले महानायक थे। बाल गंगाधर तिलक 'पूर्ण स्वराज' के सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे। उनका दिया गया नारा आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जज़्बा भर देता है। लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल की इस तिकड़ी को 'लाल-बाल-पाल' के नाम से जाना जाता था। उनका मानना था कि देश की प्रगति के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है। उन्होंने 1884 में डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी और बाद में पुणे में प्रसिद्ध फर्ग्यूसन कॉलेज की स्थापना की। उनके विचार आज भी लोगों में आत्मविश्वास पैदा करते हैं। ऐसे में यहां पढ़ें बाल गंगाधर तिलक के मोटिवेशनल कोट्स।
- स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।
- आलसी व्यक्तियों के लिए भगवान अवतार नहीं लेते, वह मेहनती व्यक्तियों के लिए ही अवतरित होते हैं, इसलिए कार्य करना आरम्भ करें।
- मानव स्वभाव ही ऐसा है कि हम बिना उत्सवों के नहीं रह सकते, उत्सव प्रिय होना मानव स्वभाव है। हमारे त्यौहार होने ही चाहिए।
- आप मुश्किल समय में खतरों और असफलताओं के डर से बचने का प्रयास मत कीजिये। वे तो निश्चित रूप से आपके मार्ग में आयेंगे ही।
- प्रातः काल में उदय होने के लिए ही सूरज संध्या काल के अंधकार में डूब जाता है और अंधकार में जाए बिना प्रकाश प्राप्त नहीं हो सकता।
- गर्म हवा के झोंकों में जाए बिना, कष्ट उठाये बिना,पैरों मे छाले पड़े बिना स्वतन्त्रता नहीं मिल सकती। बिना कष्ट के कुछ नहीं मिलता।
- ये सच है कि बारिश की कमी के कारण अकाल पड़ता है लेकिन ये भी सच है कि भारत के लोगों में इस बुराई से लड़ने की शक्ति नहीं है।
- महान उपलब्धियां कभी भी आसानी से नहीं मिलतीं और आसानी से मिली उपलब्धियां महान नहीं होतीं।
- एक बहुत पुरानी कहावत है की भगवान उन्ही की सहायता करता है,जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं।