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12 साल बाद फिर नीली हुई मुन्नार की घाटी, खिले दुर्लभ नीलकुरिंजी के फूल, जानें क्यों है खास

 Written By: Poonam Yadav
 Published : Sep 07, 2026 07:42 pm IST,  Updated : Sep 07, 2026 07:42 pm IST

12 साल के लंबे इंतजार के बाद केरल के मुन्नार की पहाड़ियां नीलकुरिंजी के नीले-बैंगनी फूलों से सज गई हैं। पश्चिमी घाट में खिलने वाले इन दुर्लभ फूलों का नजारा बेहद खूबसूरत होता है।

नीलकुरिंजी के फूल- India TV Hindi
नीलकुरिंजी के फूल Image Source : INSTAGRAM - @TREKHIEVERSOFFICIAL'S PROFI

अगर, आपको भी पहाड़ों पर खिलने वाले खूबसूरत फूल और फूलों की घाटी देखना पसंद है तो यह खबर आपके लिए है। 12 साल के लंबे इंतज़ार के बाद, इस समय केरल के मुन्नार की पहाड़ियाँ, नीलकुरिंजी के खूबसूरत फूलों से सज गई हैं। इन दिनों पश्चिमी पश्चिमी घाट का इलाका नीले और बैंगनी रंग में रंगा नजर आ रहा है। बता दें, नीलकुरिंजी के फूल बारह साल में एक बार खिलते हैं, इसलिए इनके खिलने का यह नजारा बेहद खास माना जाता है। यहां का नज़ारा इस समय इतना खूबसूरत है कि पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। चलिए जानते हैं नीलकुरिंजी आखिर बारह साल में क्यों खिलता है और इसकी खासियत क्या है?

क्या है नीलकुरिंजी का मतलब?

नीले फूलों वाली नीलकुरिंजी का नाम ही इसके रूप को दर्शाता है। नीला का अर्थ है नीला, जबकि कुरिंजी का मतलब है फूल। यह नाम इसके नीले-बैंगनी फूलों के लिए एकदम सही है। जब यह फूल खिलता है तो पूरा पहाड़ नीले रंग में रंग में रंग जाता है। आमतौर पर  यह पौधा सालों तक बिना किसी खास पहचान के रहता है और फिर अचानक शानदार ढंग से फूलों से भर जाता है।

12 साल में क्यों खिलता है नीलकुरिंजी ?

नीलकुरिंजी  के 12 साल में एक बार खिलने का कारण इसका प्राकृतिक जीवनचक्र है। इसे 'प्लीटीएसियल' या सामूहिक पुष्पन चक्र कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान पौधे कई वर्षों तक केवल बढ़ते हैं, लेकिन 12 वें साल एक साथ भारी मात्रा में फूल और बीज पैदा करते हैं। इसलिए भारी मात्रा में एक ही साथ फूल खिलते हैं। बता दें, फूल खिलने के बाद पौधे मुरझा जाते हैं और बीज छोड़ जाते हैं, जो अगले चक्र के शुरू होने तक मिट्टी में सुप्त अवस्था में पड़े रहते हैं।

नीले-बैंगनी रंग से ढक जाते हैं पहाड़

जब बड़े पैमाने पर नीलकुरिंजी के फूल खिलते हैं, तो पहाड़ियों पर नीले-बैंगनी रंग का घने कालीन  जैसी नजर आने लगती है। पहाड़ों पर दूर दूर तक खिले इन फूलों का नजारा बेहद खूबसूरत और अद्भुत होता है। माना जाता है कि नीलगिरि पहाड़ियों का नाम  नीलकुरिंजी के इसी प्राकृतिक नजारे से जुड़ा है। ‘नीलगिरि’ का अर्थ ही ‘नीले पहाड़’ होता है।

कहां उगते हैं ये फूल?

नीलकुरिंजी का फूल करीब 1,300 से 2,400 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगता है और केरल, तमिलनाडु तथा कर्नाटक के कुछ हिस्सों में इसकी मौजूदगी देखने को मिलती है। केरल के इडुक्की जिले में स्थित मुन्नार नीलकुरिंजी के फूलों के खिलने का नजारा देखने के लिए सबसे मशहूर जगहों में से एक है। फूल खिलने के दौरान एराविकुलम नेशनल पार्क, मट्टुपेट्टी और आसपास की पहाड़ियां नीले-बैंगनी रंग के फूलों से बेहद खूबसूरत नजर आती हैं। यह फूल आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर महीने के बीच ही खिलते हैं।

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