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ये एक गलती शादियों को बर्बाद कर देती है, सद्गुरु ने बताया रिलेशनशिप बचाने का मूल मंत्र

 Written By: Ritu Raj
 Published : May 13, 2026 02:09 pm IST,  Updated : May 13, 2026 02:09 pm IST

सद्गुरु किसी पहचान के मौहताज नहीं हैं। वो आए दिन सोशल मीडिया पर लोगों को प्रेरित करते हैं। अब उन्होंने रिलेशनशिप को लेकर बातें कही है। उन्होंने बताया है कि शादी को कैसे बचाया जा सकता है।

सद्गुरु ने बताया रिलेशनशिप बचाने का मूल मंत्र- India TV Hindi
सद्गुरु ने बताया रिलेशनशिप बचाने का मूल मंत्र Image Source : ISHA FOUNDATION/MAGNIFIC

शादी और रिश्तों की बारीकियों पर सद्गुरु का दृष्टिकोण हमेशा पारंपरिक सलाह से हटकर और थोड़ा गहरा होता है। अक्सर हम रिश्तों की विफलता का दोष परिस्थितियों या दूसरे व्यक्ति पर मढ़ देते हैं, लेकिन सद्गुरु के अनुसार, एक भूल है जो अधिकांश शादियों को बर्बाद कर देती है। सद्गुरु आए दिन सोशल मीडिया पर लोगों के साथ इंस्पिरेशनल स्टोरीज शेयर करते रहते हैं। ऐसे में उन्होंने रिलेशनशिप को लेकर भी अपनी बातें रखी है। उन्होंने बताया है कि शादियां क्यों खत्म हो रही है। 

ये गलती रिश्तों को बर्बाद कर रही

सद्गुरु के अनुसार, रिश्तों में दूरियां तब आती है जब हम सामने वाले व्यक्ति को अपनी 'संपत्ति' समझने लगते हैं। शुरुआत में जो प्यार और सम्मान होता है, समय के साथ वह 'अधिकार' में बदल जाता है। हम यह भूल जाते हैं कि हमारा पार्टनर भी एक व्यक्ति है, जिसकी अपनी इच्छाएं और गरिमा है। जब आप किसी पर मालिकाना हक जताते हैं, तो आप अनजाने में उनकी स्वतंत्रता का गला घोंटने लगते हैं। सद्गुरु कहते हैं कि कोई भी इंसान पिंजरे में रहना पसंद नहीं करता, चाहे वह पिंजरा सोने का ही क्यों न हो। जैसे ही रिश्ता 'साझेदारी' से 'कब्जे' में बदलता है, प्रेम का दम घुटने लगता है और रिश्ते में दूरियां आने लगती है। 

रिलेशनशिप बचाने का मूल मंत्र

1. अपनी खुशी की जिम्मेदारी खुद लें
ज्यादातर लोग शादी इसलिए करते हैं क्योंकि वे किसी और से अपनी खुशी चाहते हैं। सद्गुरु का कहना है, "अगर आप एक खुशहाल इंसान हैं, तो आपका साथ आनंददायक होगा। लेकिन अगर आप अपनी खुशी के लिए दूसरे पर निर्भर हैं, तो आप उन पर बोझ बन जाएंगे।" इसलिए खुशी मांगें नहीं, अपनी खुशी साझा करें।

2. निरंतर निवेश करें
हम अक्सर सोचते हैं कि शादी हो गई तो काम खत्म हो गया। सद्गुरु इसे एक पौधे की तरह देखते हैं। अगर आप आज उसे पानी देना बंद कर देंगे, तो वह कल सूख जाएगा। रिश्ते को हर दिन ध्यान, सम्मान और प्रेम की जरूरत होती है। यह कोई 'अचीवमेंट' नहीं है जिसे हासिल कर लिया गया, बल्कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है।

3. प्रशंसा 
रिश्ते में कड़वाहट तब आती है जब हम दूसरे व्यक्ति की अच्छाइयों को 'Grant it' लेने लगते हैं। सद्गुरु सलाह देते हैं कि अपने साथी के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहें कि उन्होंने आपके जीवन का हिस्सा बनना चुना।

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