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गंभीर कम्प्रेशन से पीड़ित ब्रिटिश नागरिक को भारत में मिली नई जिंदगी

 Reported By: IANS
 Published : Dec 06, 2017 03:43 pm IST,  Updated : Dec 06, 2017 03:43 pm IST

ब्रिटिश नागरिक साइमन पॉवेल (63) को इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने नई जिन्दगी दी है। वह मालदीव्स में डाइविंग के दौरान गंभीर डीकम्प्रेशन का शिकार हो गए थे।

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हेल्थ डेस्क: ब्रिटिश नागरिक साइमन पॉवेल (63) को इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने नई जिन्दगी दी है। वह मालदीव्स में डाइविंग के दौरान गंभीर डीकम्प्रेशन का शिकार हो गए थे। उन्हें माले से एयरलिफ्ट कर यहां लाया गया था। इस दौरान उनकी हालत तेजी से बिगड़ रही थी और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की जरूरत थी। अस्पताल की तरफ से जारी बयान के अनुसार, अपनी पत्नी के साथ एक प्राइवेट रिजॉर्ट में छुट्टी मना रहे साइमन को सांस लेने में परेशानी होने लगी। उन्हें तुरंत एक रेजीडेन्ट डॉक्टर के पास ले जाया गया, डॉक्टर ने बताया कि साइमन को तुरंत हाइपरबैरिक चैम्बर की जरूरत है। उन्हें तुरन्त नजदीकी द्वीप तक पहुंचाया गया और आठ घण्टे के लिए हाइपरबैरिक चैम्बर में रखा गया।

माले अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी हालत में सुधार लाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी हालत खराब होती जा रही थी, उन्हें विश्वस्तीय चिकित्सा सेवाओं की जरूरत थी। एयर एम्बुलेन्स सेवाएं संचालित करने वाली ईस्ट-वेस्ट रेस्क्यू - साइमन की इंश्योरेन्स कम्पनी के साथ बातचीत कर अंतिम फैसले पर पहुंची कि सर्वश्रेष्ठ इलाज सेवाएं नई दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स में ही उपलब्ध हैं, जो इस तरह के मामलों के लिए सभी अत्याधुनिक सेवाओं से युक्त है।

चार घण्टे की उड़ान के बाद साइमन नई दिल्ली में थे। अब उन्हें इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के अनुभवी डॉक्टर इलाज दे रहे थे।

इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ सलाहकार (इंटरनल एण्ड हाइपरबैरिक मेडिसिन) डॉ. तरुण साहनी ने बताया, "साइमन जब यहां पहुंचे, हालांकि वे होश में थे, लेकिन कुछ विचलित स्थिति में थे। उन्हें तुरंत रीकम्प्रेशन थेरेपी दी गई। उनकी ब्रेन एमआरआई में पता चला कि दिमाग में कुछ एम्बोलिक एरिया के चलते वे डीकम्प्रेशन का शिकार हुए थे।"

उन्होंने कहा, "इलाज के बाद ऐसा लगता है कि जैसे कुछ चमत्कार हो गया हो, इतनी दर्दनाक घटना से उबरने के बाद वे आज अपने आप को सकारात्मक और ताकतवर महसूस कर रहे हैं। धीरे-धीरे उनके संज्ञानात्मक गतिविधियों में सुधार हो रहा है। दोनों टांगों में माइल्ड पैरेन्थेसिया कम हुआ है और उनकी चाल में भी सुधार हुआ है। साइमन की कहानी अपने आप में चमत्कार का बेहतरीन उदाहरण है।"

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