1. Hindi News
  2. लाइफस्टाइल
  3. जीवन मंत्र
  4. नहीं होना चाहते असफल तो इस एक चीज को त्यागना है बेहद जरूरी, वरना किसी भी हाल में जीत अंसभव

नहीं होना चाहते असफल तो इस एक चीज को त्यागना है बेहद जरूरी, वरना किसी भी हाल में जीत अंसभव

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Jan 10, 2021 07:41 am IST,  Updated : Jan 10, 2021 07:41 am IST

खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।

Chanakya Niti-चाणक्य नीति- India TV Hindi
Chanakya Niti-चाणक्य नीति Image Source : INDIA TV

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भरे ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार ईर्ष्या और असफलता पर आधारित है। 

'ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। ईर्ष्या करने से अपना ही महत्व कम होता है।' आचार्य चाणक्य 

आचार्य चाणक्य का कहना है कि मनुष्य को कभी भी किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। ये एक ऐसी चीज है जिसका अंजाम सिर्फ एक ही होता है और वो है असफलता। ऐसा इसलिए क्योंकि ईर्ष्या करने वाले व्यक्ति के दिमाग में चौबीस घंटे सिर्फ और सिर्फ दूसरों का अहित कैसे करें..सिर्फ यही चलता रहता है। ऐस में उनका अपने लक्ष्य से भटकना लाजमी है। 

इस एक चीज को बरकरार रखने में मनुष्य का पूरा जीवन हो जाता है समर्पित, टूटने में लगते हैं चंद सेकेंड

असल जिंदगी में आपका पाला इस तरह के लोगों से जरूर पड़ा होगा। ये ऐसी प्रवृ्ति के लोग हैं जो सिर्फ और सिर्फ इसी बात से दुखी रहते हैं कि सामने वाला कैसे खुश है। ऐसा करके वो ना केवल अपना समय बर्बाद करते हैं बल्कि अपनी सोच भी संकुचित कर लेते हैं। उन्हें इस बात से मतलब नहीं होता कि वो क्या कर रहे हैं। उन्हें सिर्फ इससे मतलब होता है कि दूसरा उनसे आगे कैसे निकल रहा है। 

इस स्वभाव वाले व्यक्ति को कोई भी आसानी से बना सकता है मूर्ख, खुद को कंट्रोल करने में ही है भलाई

वो उन्हें हराने के लिए साम, दाम, दंड और भेद सारी नीतियां अपनाते हैं। कई बार उनकी ये नीतियां शुरुआत में सफल भी हो जाती है। लेकिन अंत में उनके हाथ असफलता के अलावा और कुछ नहीं लगता। जब तक उन्हें इस बात का अहसास होता है कि उन्होंने ये जो कुछ भी कहा और किया उससे समय बर्बाद हुआ। इसके साथ ही उनका अपने जीवन को संवारने में जो वक्त था वो भी किसी बुरी चीज पर खर्च हुआ। जब तक उन्हें इस बात का पता चलता है उनके हाथ में खुद को संभालने के लिए कुछ भी नहीं बचता। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। ईर्ष्या करने से अपना ही महत्व कम होता है।

 

 

 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Religion से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें लाइफस्टाइल