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प्रयागराज में है एक अनोखा मंदिर, यहां लेटे हैं हनुमान

प्रयागराज के इलाहाबाद के इस प्राचीन मंदिर में लेटे हैं हनुमान

Written by: India TV Entertainment Desk
Published : Jan 09, 2019 07:02 pm IST, Updated : Jan 09, 2019 07:02 pm IST
प्रयागराज- India TV Hindi
प्रयागराज

भारत में हनुमान जी को विशेष तौर से पू़जा जाता है। यहां हनुमान जी के कई भव्य मंदिर स्थापित हैं और हर मंदिर में हनुमान जी को अलग अलग मुद्राओॆ में स्थापित किया जाता हैं। आपको बता दें कि हनुमान जी की हर मुद्रा को लेकर कुछ न कुछ कहानियां प्रसिद्ध हैं। आपको जानकर बेहद हैरानी होगी कि एक प्राचीन मंदिर ऐसा भी हैं जंहा हनुमान जी को लेटी हुई मुद्रा में स्थापित किया गया है। 

जी हां उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में हनुमान जी का एक ऐसा और इकलौता प्राचीन मंदिर है, जहां हनुमान जी लेटे हुए हैं। ये 20 फीट लम्बी प्रतिमा हैं। ये मंदिर संगम किनारे बना है। ये प्राचीन मंदिर काफी छोटा दिखता है, लेकिन इस मंदिर में बहुत लोगों की आस्था हैं। बता दें, ये हनुमान जी के मंदिरों में से सबसे अनोखा मंदिर हैं। 

मंदिर से जुड़ी कथा-

ये कथा राम कथा और हनुमान के पुनर्जन्म से जुड़ी हुई है। लंका में विजय प्राप्त करने के बाद जब हनुमान पीड़ित होकर मूर्छित हो गए थे, तो इसी स्थान पर माँ जानकी ने उन्हें अपना सुहाग का प्रतीक सिन्दूर और आशीर्वाद देकर नया जीवन प्रदान किया था। इसके साथ ही ये भी कहा था कि जो भी त्रिवेणी तट पर संगम स्नान पर आयेगा उसे हनुमान जी के दर्शन के बाद ही स्नान का पूरा फल मिलेगा। बता दें, माँ जानकी के हनुमान जी को सिन्दूर देने के बाद से ही हनुमान पर सिन्दूर चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई थी।

इस के साथ ही एक कथा और भी है, कहा जाता है कि एक हनुमान भक्त जलमार्ग से हनुमान की मूर्ति लेकर आ रहा था, लेकिन मूर्ति का भार ज्यादा होने के कारण वो यमुना में डूब गई और पानी की लहरों के साथ बहुत दूर पहुंच गई। उस समय अकबर का शासन था। मौके का फायदा उठाकर अकबर ने उस मूर्ति के लिए मंदिर का निर्माण करवाया और  काफी हिंदू लोगों का दिल जीता। 

मंदिर का इतिहास-

बताया जाता है कि भारत में जब औरंगजेब का राज़ हुआ करता था तो धर्म के चलते अनेकों बार उसने इस प्रतिमा को तोड़ने व हटाने का प्रयास किया था, लेकिन बलशाली हनुमान जी को अकेला औरंगजेब तो क्या उसके 100 सिपाही एक साथ ज़ोर लगाने पर भी हिला तक नहीं पाए। अंत में सैनिक जब गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए तो औरंगजेब हार मान कर पीछे हट गया।

वैसे तो देश के कोने कोने से न जाने कितने लोग मन में श्रद्धा लिए हनुमान जी के दर्शन करने आते हैं। लेकिन प्राचीन समय में महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और न जाने कितने ही महान लोगों ने इस धार्मिक स्थान पर अपना सर झुकाया है। कहा जाता है कि इस स्थान से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता हनुमान जी सभी भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।

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