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भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष, शुक्रवार को अखंड पूजा करेंगे हिंदू

 Edited By: Shakti Singh
 Published : May 21, 2026 11:50 pm IST,  Updated : May 21, 2026 11:54 pm IST

हिंदू पक्ष के लोग शुक्रवार को भोजशाला में अखंड पूजा करेंगे। इस मौके पर भारी संख्या में लोग जुट सकते हैं। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए 1500 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

Bhojshala- India TV Hindi
भोजशाला में आरती करते लोग Image Source : PTI

मध्य प्रदेश के धार जिले में मौजूद भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के हाल के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। यह याचिका मामले में दखल देने वाले काजी मोइनुद्दीन की तरफ से दाखिल की गई है। इसमें हाई कोर्ट के 15 मई के आदेश को चुनौती दी गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इस जगह को हिंदू मंदिर मानते हुए वहां नमाज पढ़ने पर रोक लगाने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हाई कोर्ट का फैसला गलत है और इससे उनके धार्मिक अधिकार प्रभावित होते हैं। वहीं हिंदू पक्ष लंबे समय से इस जगह को मां वाग्देवी का मंदिर बताता रहा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने शुक्रवार को अखंड पूजा करने का ऐलान किया है। इस मौके पर किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

1500 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात

भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में 1,500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। वहीं, निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाईकोर्ट का फैसला हिंदुओं के पक्ष में आने के बाद यह पहला शुक्रवार है। इसी दिन परिसर में नमाज पढ़ी जाती थी। 22 मई को पहला शुक्रवार होगा, जब यहां नमाज नहीं होगी। वहीं, हिंदू पक्ष ने इसी दिन अखंड पूजा करने का ऐलान किया है। इस वजह से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भोज उत्सव समिति का दावा है कि 721 वर्षों में यह पहला अवसर होगा, जब 11वीं शताब्दी के भोजशाला परिसर में सामूहिक 'अखंड पूजा' होगी।

हाईकोर्ट ने भोजशाला को मंदिर माना

जिला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अदालत के आदेशों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई को अपने फैसले में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर करार दिया है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। 

सिर्फ मंगलवार को पूजा कर सकते थे हिंदू

हाईकोर्ट के फैसले से पहले हिंदू समुदाय को केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति थी, जबकि मुस्लिम समुदाय लंबे समय से शुक्रवार को वहां नमाज अदा करता रहा है। दोनों समुदाय इस परिसर पर दावा करते रहे हैं। धार के पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कहा कि परिसर और उसके आसपास नौ स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसमें वाहनों की जांच, मोबाइल गश्त, सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन से नजर रखने की व्यवस्था शामिल है। अदालत के फैसले के बाद हिंदू संगठनों ने मंगलवार को परिसर में पूजा-अर्चना की और आतिशबाजी के साथ 'विजय उत्सव' मनाया था। अधिकारियों ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों को ''पूरी तरह से लागू'' किया जाएगा और लोगों से अफवाहों तथा भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट पर ध्यान नहीं देने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि परिसर में ऐसी किसी नई धार्मिक गतिविधि या परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसे पहले अनुमति प्राप्त नहीं थी।

भोजशाला पहुंचकर महाआरती करेंगे हिंदू

भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा कि हिंदू समुदाय के लोग शुक्रवार दोपहर धन मंडी चौक पर एकत्र होंगे और वहां से जुलूस के रूप में भोजशाला पहुंचकर 'महाआरती' करेंगे। जैन ने कहा, ''721 साल बाद यह शुक्रवार आया है और यह हमारे स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है। पूरा हिंदू समाज भोजशाला में पूजा करेगा।'' उन्होंने दावा किया कि दशकों से इस स्थल पर पूजा को लेकर हिंदुओं को प्रतिबंधों और विवादों का सामना करना पड़ा है, खासकर तब जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती थी।

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