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'मरा हुआ इंसान फोन कॉल कैसे कर सकता है?' पुलिस की मक्कारी से परेशान हुए जज, जांच के आदेश दिए

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Aug 03, 2025 11:20 am IST,  Updated : Aug 03, 2025 11:20 am IST

अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति मरने के बाद अपनी प्रेमिका से फोन पर बात कैसे कर सकता है। इसके बाद दोनों आरोपियों को बरी करते हुए अदालत ने पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच की बात कही।

Representative Image- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : FREEPIK

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने हत्या के एक मामले में आरोपी बाप-बेटे को बरी करते हुए पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है, जिसका पालन पुलिसकर्मियों को किसी भी केस में जांच करते समय करना होगा। अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति मरने के बाद अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फोन पर बात कैसे कर सकता है। इसी आधार पर पुलिस की जांच को अविश्वसनीय करार दिया गया और दोनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।

क्या है मामला?

मध्य प्रदेश के मंडला जिले से 19 सितंबर 2021 को राजेंद्र नाम का एक युवक लापता हो गया था और बाद में उसकी लाश मिली थी। पुलिस ने इस मामले में नैन सिंह धुर्वे और उनके बेटे को हत्या का आरोपी बनाया। पुलिस ने पांच महीने बाद केरल से चेत सिंह नाम के एक युवक को बुलाया और मामले का गवाह बनाया। चेत सिंह नौकरी की तलाश में केरल गया था। चेत सिंह ने अदालत को बताया कि 19 सितंबर 2021 को उसकी बाइक खराब हो गई थी। ऐसे में वह आरोपियों के यहां रुका था और उसने देखा था कि दोनों आरोपी किसी व्यक्ति को पीट रहे थे।

सेशन कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

गवाह और पुलिस जांच के आधार पर मंडला की सेशन कोर्ट ने दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की बेंच ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। पुलिस ने कहा था कि मृतक राजेंद्र और आरोपी नैन सिंह की बेटी के बीच प्रेम संबंध थे। इसी वजह से नैन सिंह ने अपने बेटे के साथ मिलकर राजेंद्र की हत्या कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि राजेंद्र की मौत 19 सितंबर को लापता होने के 3-4 दिन बाद हुई थी। वहीं, कॉल डीटेल में सामने आया कि मृतक 25 सितंबर तक आरोपियों की बेटी/बहन से बात कर रहा था।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि अभी विज्ञान इतना भी आगे नहीं पहुंचा है कि कोई व्यक्ति मरने के बाद भी अपने प्रेमिका से फोन पर बात कर सके। यह जांच की असलियत, झुठे गवाह और पुलिस की कपटपूर्ण कार्य प्रणाली को उजागर करता है। कोर्ट ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि चेत सिंह को जबरन का गवाह बनाया गया था। पुलिस ने उस लड़की का भी बयान नहीं लिया, जिसके साथ मृतक के प्रेम संबंध होने की बात कही गई। लड़की से यह तक नहीं पूछा गया कि वह किसी के साथ प्रेम संबंध में थी भी या नहीं। मृतक के परिजनों ने भी लड़की के साथ उसके प्रेम संबंध का कोई जिक्र नहीं किया और कहीं पर भी यह नहीं कहा गया कि इस प्रेम संबंध से लड़की के परिवार वालों को कोई आपत्ति थी।

पुलिस के लिए निर्देश

अदालत ने इस मामले की जांच करने वाले अधिकारी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए। 30 दिन में इसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के डीजीपी को राज्य स्तर पर ठोस और निष्पक्ष जांच के लिए दिशा निर्देश जारी करने को कहा है। झूठे गवाह पेश करने की प्रवृत्ति कम करने के लिए भी कार्रवाई करने के लिए कहा है। इससे पहले भी अदालतें दो बड़े मामलों में पुलिस की जांच पर सवाल उठा चुकी हैं। मालेगांव ब्लास्ट के मामले में भी अदालत ने पुलिस की जांच पर सवाल खड़े करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इससे पहले महाराष्ट्र ट्रेन ब्लास्ट के मामले में भी अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।

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