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मेडिकल और एजुकेशन के कॉमर्शियल होने और कैंसर के महंगे इलाज को लेकर मोहन भागवत ने जताई चिंता, कही ये बात

 Published : Aug 10, 2025 11:44 pm IST,  Updated : Aug 10, 2025 11:44 pm IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मेडिकल और एजुकेशन के व्यापारीकरण और कैंसर के महंगे इलाज को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि आम लोगों के लिए ये चीजें सहज, सुलभ और सस्ती होनी चाहिए।

Mohan Bhagwat- India TV Hindi
मोहन भागवत Image Source : ANI

इंदौर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने इंदौर में मेडिकल और एजुकेशन के कॉमर्शियल होने को लेकर चिंता जाहिर की और कहा कि ये वक्त की मांग है कि इन दोनों सेक्टरों में आम लोगों को सहज, सुलभ, सस्ती और सहृदय सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।

'माधव सृष्टि आरोग्य केंद्र' का उद्घाटन किया 

भागवत इंदौर में कैंसर के मरीजों के किफायती इलाज के लिए 'माधव सृष्टि आरोग्य केंद्र' का उद्घाटन करने के लिए पहुंचे थे। यह केंद्र ‘गुरुजी सेवा न्यास’ नाम के परमार्थ संगठन ने शुरू किया है।

इस मौके पर आयोजित समारोह में भागवत ने कहा, "(अच्छी) चिकित्सा और शिक्षा की सारी योजनाएं आज समाज के हर व्यक्ति की बहुत बड़ी आवश्यकता बन गई है, लेकिन दुर्भाग्य ऐसा है कि दोनों क्षेत्रों की (अच्छी) सुविधाएं आम आदमी की पहुंच और आर्थिक सामर्थ्य के दायरे से बाहर हैं। पहले चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्रों में सेवा की भावना से काम किए जाते थे, लेकिन अब इन्हें भी कमर्शियल (वाणिज्यिक) बना दिया गया है।" 

देश में कैंसर के महंगे इलाज पर चिंता जताई

देश में कैंसर के महंगे इलाज को लेकर भी भागवत ने चिंता जाहिर करते हुए कहा, "कैंसर के इलाज की अच्छी सुविधाएं केवल आठ-दस शहरों में मौजूद हैं जहां देश भर के मरीजों को बड़ी धनराशि खर्च करके जाना पड़ता है। आम लोगों के लिए चिकित्सा और शिक्षा की अच्छी सुविधाएं पेश करने के वास्ते समाज के सक्षम और समर्थ लोगों को आगे आना चाहिए।"

संघ प्रमुख ने कहा,"कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) जैसे शब्द बेहद तकनीकी और औपचारिक हैं। सेवा के संदर्भ में हमारे यहां एक शब्द है-धर्म। धर्म यानी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाना। धर्म समाज को जोड़ता है और समाज को उन्नत करता है।"

भागवत ने कहा, "पश्चिमी देश चिकित्सा के क्षेत्र में अपने एक जैसे मानक दुनिया के अन्य हिस्सों के देशों पर लागू करने की सोच रखते हैं, लेकिन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में मरीजों का उनकी अलग-अलग प्रकृति के आधार पर इलाज किया जाता है।" (इनपुट: भाषा)

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