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NEET पेपर लीक मामले में लातूर का डॉक्टर गिरफ्तार, पूछताछ के बाद CBI ने कसा शिकंजा

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : May 21, 2026 06:38 pm IST,  Updated : May 21, 2026 06:49 pm IST

NEET पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच लगातार तेज होती जा रही है। लातूर के औसा रोड इलाके के डॉक्टर मनोज शिरुरे को CBI ने पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है।

डॉक्टर मनोज शिरुरे - India TV Hindi
डॉक्टर मनोज शिरुरे Image Source : REPORTER

महाराष्ट्र के लातूर से NEET पेपर लीक मामले में एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। सीबीआई ने पूछताछ के दायरे में आए डॉक्टर मनोज शिरुरे को पुणे से गिरफ्तार किया है। इससे पहले कल लातूर स्थित उनके अस्पताल में CBI की टीम ने करीब तीन घंटे तक गहन पूछताछ की थी। 

इस मामले में लातूर से अब तक पी. वी. कुलकर्णी, RCC कोचिंग क्लासेस के प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर और अब डॉक्टर मनोज शिरुरे का नाम सामने आया है। जैसे-जैसे CBI की जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे NEET पेपर लीक मामले में लातूर कनेक्शन और गहराता नजर आ रहा है।

बाल रोग विशेषज्ञ मनोज शिरुरे से लंबी पूछताछ

सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने पेपर लीक मामले के सिलसिले में लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ मनोज शिरुरे से लंबी पूछताछ की। सूत्रों ने दावा किया कि शिरुरे ने कथित तौर पर अपने बेटे के लिए लीक हुए NEET के प्रश्न पत्र खरीदे थे। उनके बेटे ने इस साल मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी। शिरुरे को बुधवार रात पुणे ले जाया गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, शिरुरे कथित तौर पर रसायन विज्ञान के सेवानिवृत्त प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी और RCC क्लासेस के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर के संपर्क में थे। ये दोनों ही इस जांच के दायरे में हैं। सूत्रों ने बताया कि शिरुरे के बेटे ने कथित तौर पर RCC क्लासेस के अलावा किसी अन्य संस्थान से कोचिंग ली थी।

कोचिंग का संचालक पहले ही हो चुका है गिरफ्तार

जांच के दौरान पहले RCC क्लासेस के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया गया था और रसायन विज्ञान के सेवानिवृत्त प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी की जांच की गई थी; जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि अंतिम प्रश्न पत्र चुने जाने से पहले तैयार किए गए रसायन विज्ञान के कई प्रश्न पत्र सेट तक कुलकर्णी की पहुंच थी।

CBI के अनुसार, NEET-UG 2026 के अंतिम प्रश्न पत्र के रसायन विज्ञान खंड के 45 प्रश्नों में से 43 प्रश्न कथित तौर पर RCC के "गेस पेपर" (अनुमानित प्रश्न पत्र) के माध्यम से पहले बांटे गए प्रश्नों से मेल खाते थे। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि कथित पेपर लीक का यह नेटवर्क एक ऐसी शृंखला के माध्यम से काम करता था जिसमें प्रश्न पत्र सेट तक पहुंच बनाना, बिचौलियों के माध्यम से उन्हें बांटना और अंततः परीक्षा से पहले चुने हुए उम्मीदवारों और उनके परिवारों तक उन्हें पहुंचाना शामिल था।

रिपोर्टः आसिफ पटेल

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