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मुंबई एयरपोर्ट के पास नमाज शेड विवाद पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई, सरकार ने कहा- 'पास में ही तीन मस्जिदें मौजूद'

 Reported By: Saket Rai Edited By: Subhash Kumar
 Published : Feb 26, 2026 09:32 pm IST,  Updated : Feb 26, 2026 09:32 pm IST

मुंबई एयरपोर्ट के पास नमाज शेड को लेकर विवाद पर गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट में जानकारी दी है कि एयरपोर्ट से कुछ ही दूरी पर तीन मस्जिदें हले से ही मौजूद हैं।

Namaz shed dispute near Mumbai Airport- India TV Hindi
मुंबई एयरपोर्ट के पास नमाज शेड के विवाद पर सुनवाई। Image Source : PTI/ANI

मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 स्थित वीआईपी गेट के पास ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए बनाए गए नमाज शेड को हटाने के मुद्दे पर गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने अदालत को बताया कि एयरपोर्ट परिसर के आसपास कम से कम तीन मस्जिदें हैं, इसलिए अलग से प्रार्थना शेड की जरूरत नहीं है। आइए जानते हैं कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान किस पक्ष ने क्या दलील पेश की है।

'हर जगह विशेष सुविधा उपलब्ध कराना संभव नहीं'

गुरुवार बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अधिवक्ता ज्योति चव्हाण ने कहा कि नजदीकी मस्जिद महज 5 से 10 मिनट की दूरी पर है और ड्राइवर वाहन पार्क कर वहां जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर स्थान पर विशेष सुविधा उपलब्ध कराना संभव नहीं है और संबंधित शेड पहले ही हटाया जा चुका है।

'13 मिनट पैदल चलने में क्या दिक्कत है'

एयरपोर्ट ऑपरेटर की तरफ से पेश वकील विक्रम ननकानी ने बताया कि गेट-9 वीआईपी आवागमन का प्रवेश द्वार है और यह पुराना टर्मिनल क्षेत्र है। उनके मुताबिक, एक मस्जिद करीब 13 मिनट, दूसरी 18 मिनट और तीसरी उससे अधिक दूरी पर है। उन्होंने सवाल किया कि 13 मिनट पैदल चलने में क्या दिक्कत है। MMRDA ने यह भी कहा कि स्थानीय पुलिस ने वीआईपी गेट के पास बने शेड को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील बताया था।

विपक्ष के वकील ने क्या तर्क दिया?

ऑटो-टैक्सी-ओला-उबर ड्राइवर यूनियन की ओर से अधिवक्ता शहजाद नकवी ने तर्क दिया कि शेड को सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि अवैध निर्माण बताकर हटाया गया। उनका कहना था कि यह ढांचा लगभग 30 वर्षों से मौजूद था और पहले कभी कोई आपत्ति नहीं उठाई गई।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?

बता दें कि इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीपी कोलाबावाला और जस्टिस एफपी पूनावाला की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं समय के साथ बदलती हैं। साथ ही यह भी कहा कि मस्जिद एक विकल्प हो सकती है, लेकिन यदि रमजान के दौरान बिना सुरक्षा से समझौता किए अस्थायी व्यवस्था संभव हो तो उसका प्रस्ताव नक्शे सहित पेश किया जाए। अदालत ने MMRDA को 5 मार्च तक यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या रमजान के लिए अस्थायी ढांचा बनाया जा सकता है, जिसे बाद में हटाकर स्थान को पूर्व स्थिति में बहाल किया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च को तय की गई है।

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