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Matka King Review: विजय वर्मा ने उठाया एंटरटेनमेंट का बीड़ा, कितना है 'मटका किंग' की कहानी में दम?

 Written By: ट्विंकल गुप्ता
 Published : Apr 17, 2026 07:29 am IST,  Updated : Apr 17, 2026 07:52 am IST

Matka King Review: नागराज पोपटराव मंजुले की पीरियड ड्रामा सीरीज में विजय वर्मा ने जबरदस्त परफॉर्मेंस दी है, जो अब प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है। इसमें कृतिका कामरा और गुलशन ग्रोवर भी अहम किरदारों में नजर आ रहे हैं। यहां पूरा रिव्यू पढ़ें।

Vijay Varma
विजय वर्मा Photo: PRIME VIDEO
  • फिल्म रिव्यू: मटका किंग रिव्यू
  • स्टार रेटिंग 3.5/5
  • पर्दे पर: April 17, 2026
  • डायरेक्टर: Nagraj Popatrao Manjule
  • शैली: Period-crime drama

'गुस्ताख इश्क' में एक उभरते हुए शायर का किरदार निभाने के बाद विजय वर्मा अब अभय कोरान्न द्वारा बनाई गई 'मटका किंग' से छा गए हैं। यह पीरियड क्राइम ड्रामा सिंधी व्यापारी रतन खत्री के जीवन से प्रेरित है, जो बंटवारे के दौरान अपने भाई के साथ मुंबई आ गए थे। अपना कुछ अलग बनाने की चाह में बृज भट्टी ने 1960 के दशक में एक छोटे से स्थानीय सट्टेबाजी के खेल को 'मटका' नाम के एक लोकप्रिय सट्टे के खेल में बदल दिया। यह 8 एपिसोड की सीरीज उनके बनाए मशहूर जुआ खेल 'मटका' पर आधारित है और यह भी दिखाती है कि पैसा इंसान के चरित्र को कैसे बदल देता है। इसमें लालच, विश्वासघात, ईमानदारी, जुनून और उलझे रिश्तों की कहानी दिखाता है।

मटका किंग: कहानी

विजय वर्मा ने सीरीज में बृज भट्टी का किरदार निभाया हैं, जो मुंबई की एक चाल में अपनी गर्भवती पत्नी बरखा (सई ताम्हनकर) और छोटे भाई लाछू (भूपेंद्र जादवत) के साथ रहने वाला एक कपास व्यापारी है। वह एक कॉटन मिल में मैनेजर के तौर पर काम करता है और अपने बॉस को ताश पर आधारित एक सट्टेबाजी का खेल चलाने में भी मदद करता है, जहां लोग 0 से 9 तक के अंकों पर दांव लगाते हैं। जीतने वालों को न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज की दरों के आधार पर भुगतान किया जाता है। हालांकि, उसका बॉस लालजीभाई (गुलशन ग्रोवर) बेईमान है और सट्टा लगाने वालों के साथ ईमानदारी से खेलने के बजाय, अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए कभी-कभी जीतने वाला नंबर बदलकर नतीजों में हेरफेर करता है।

जल्द ही बृज भट्टी के किरदार के बारे में और भी बातें सामने आती हैं। हालात तब और बिगड़ जाते हैं, जब जुए की लत के कारण उसका भाई एक फाइनेंसर के साथ मुसीबत में फंस जाता है। बृज उसे बचाने के लिए दस दिनों में दोगुनी रकम चुकाने का वादा करता है। अपने बॉस से कोई मदद न मिलने पर जो उलटा उसे जलील करता है, बृज उसकी नौकरी छोड़ने और अपना कुछ काम शुरू करने का फैसला करता है। इसी तरह उसके 'मटका गेम' की शुरुआत होती है, जो सिर्फ एक ही उसूल पर टिका है - ईमानदारी। यह देखने के लिए कि कैसे एक साधारण कॉटन मिल मैनेजर उठकर सबसे ताकतवर बिजनेसमैन में से एक बन जाता है और कैसे कामयाबी धीरे-धीरे उसकी जिंदगी बदल देती है। आगे की कहानी के लिए आपको 'मटका किंग' देखनी पड़ेगी।

मटका किंग: लेखन और निर्देशन

निर्देशक नागराज पोपटराव मंजुले ने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया है। कुल मिलाकर 'मटका किंग' सीरीज की कहानी अच्छी है, ज्यादातर एपिसोड तेज रफ्तार से आगे बढ़ते हैं, सिवाय कुछ पलों के जहां कहानी थोड़ी धीमी या अटकी हुई सी लगती है। एक्शन सीन भी परदे पर काफी शानदार लगते हैं। कुछ जगहों पर ऐसा लगा कि कुछ किरदारों के सफर को पूरी तरह से नहीं दिखाया गया है और उनकी कहानियों में गहराई की कमी है।

मटका किंग: तकनीकी

संगीतकारों ने भी बेहतरीन काम किया है। उन्होंने किशोर कुमार के गाने 'जिंदगी एक सफर' का इस्तेमाल किया है। इसके अलावा, अजय जयंती द्वारा तैयार किया गया टाइटल ट्रैक भी नजरअंदाज करने लायक नहीं है, क्योंकि यह सीरीज की थीम के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। साउंड डिपार्टमेंट ने भी जबरदस्त काम किया है। एक्शन सीन एकदम असली और स्वाभाविक लगते हैं, न कि बनावटी या जबरदस्ती के।

मटका किंग: क्या अच्छा है

'मटका किंग' काफी दिलचस्प है, इसमें बेहतरीन कलाकार हैं और इसे एक ही बार में पूरा देखा जा सकता है। किरदारों के कॉस्ट्यूम्स बहुत अच्छे हैं, जो 1960 के दशक के बंबई के माहौल को पूरी तरह से पेश करते हैं। निर्माताओं ने कहानी के अंत को उसके शुरुआती सीन से जोड़ने की भी कोशिश की है, जिससे कहानी का सफर पूरा होता हुआ महसूस होता है। इससे दर्शक शुरू से ही उत्सुक बने रहते हैं और धीरे-धीरे उन्हें पता चलता है कि विजय वर्मा का किरदार उस हालात में कैसे पहुंचा।

मटका किंग: कहां रह गई कमी

कुछ ऐसे पल हैं, जहां मुझे लगा कि मेकर्स ग्रीन स्क्रीन पर शूट करने जैसा दिखाने के बजाय असली कार के शॉट्स इस्तेमाल कर सकते थे। कुछ दृश्यों में ऐसा लगा जैसे कार एक जगह खड़ी है, जबकि बैकग्राउंड आगे बढ़ रहा है। इस कराण दर्शकों का ध्यान थोड़ा भटकता है।

मटका किंग: एक्टिंग और परफॉर्मेंस

विजय वर्मा ने इस पीरियड ड्रामा और जुए की कहानी में ब्रिज भट्टी के अपने किरदार को बखूबी निभाया है। चाहे वह गंभीर और इंटेंस पल हों, इमोशनल सीन हों या लीडरशिप वाले सीक्वेंस हों, उन्होंने एक एक्टर के तौर पर अपनी पूरी रेंज दिखाई है और एक दमदार परफॉर्मेंस दी है।

उनके साथ कृतिका कामरा ने गुलरुख दुबाश के तौर पर अपनी परफॉर्मेंस से कहानी को और भी बेहतर बनाया है। साई ताम्हणकर ने बरखा भट्टी के तौर पर बहुत अच्छा काम किया है। वह एक ऐसी मददगार पत्नी हैं जो अपने परिवार के लिए सब कुछ करती है, लेकिन साथ ही अपनी खुद की पहचान बनाने की भी चाह रखती है, जिसमें अपनी कॉलेज की डिग्री पूरी करना और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना शामिल है।

दूसरी ओर, सिद्धार्थ जाधव ने दगडू विचारे के तौर पर एक मराठी किरदार के लिए एकदम सही चुनाव साबित हुए हैं और उन्होंने बहुत लगन से अपना किरदार निभाया है। भूपेंद्र जादवत ने ब्रिज भट्टी के छोटे भाई लाचू के तौर पर एक अहम भूमिका निभाई है और अपने किरदार के अलग-अलग पहलुओं को दिखाया है- वह चालाक और लालची भी है। आखिर में गुलशन ग्रोवर ने लालजी भाई का किरदार निभाया है, जो एक कॉटन मिल चलाते हैं। उन्होंने एक नेगेटिव रोल निभाया है और वही किया है, जिसमें वह सबसे माहिर हैं।

सपोर्टिंग कास्ट में भारत जाधव (ईमानदार सब-इंस्पेक्टर एकनाथ तुम्बाडे), गिरीश कुलकर्णी (खोजी पत्रकार टीपी डिसूजा), जेमी लीवर (सुलभा), किशोर कदम (राजनेता), साइरस साहूकार (एक्टर मकसूद), अर्पिता सेठी (वसुधा), संभाजी तांगाडे (मिल मजदूर), इश्तियाक खान (फाइनेंसर जीनू मास्टर), संजीव जोतांगिया (अखबार के एडिटर) और सिमरन (लालजी भाई की बेटी) शामिल हैं। इन सभी ने कहानी को और भी मजबूत बनाया है।

मटका किंग कैसी है

कुल मिलाकर 'मटका किंग' देखने लायक एक अच्छी सीरीज है। इसमें थ्रिल और सस्पेंस भरपूर देखने को मिलेगा। शो की स्क्रिप्ट इस तरह से लिखी गई है कि हर गुजरते एपिसोड के साथ आप इसे एक ही बार में पूरा देखना चाहेंगे। इसका श्रेय इसके क्लिफहैंगर को जाता है। विजय वर्मा ने 'बृज भट्टी' का किरदार इतनी बेहतरीन तरह से निभाया है, मानो यह रोल उन्हीं के लिए बना हो।

इस सीरीज में एक शानदार कलाकारों की टोली भी शामिल है, जिसमें कृतिका कामरा, साई ताम्हणकर, सिद्धार्थ जाधव, भूपेंद्र जादवत और गुलशन ग्रोवर जैसे कलाकार शामिल हैं। ये सभी स्टार्स कहानी को और भी ज्यादा दमदार बनाते हैं। हालांकि, इसमें कुछ कमियां भी हैं जैसे कि तकनीकी और पेसिंग से जुड़ी दिक्कतें, लेकिन अगर आपको विजय वर्मा और थ्रिलर शो पसंद हैं तो आप बिल्कुल भी निराश नहीं होंगे।

'मटका किंग' 5 में से 3.5 स्टार्स का हकदार है।

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