2 जुलाई को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और गुरुवार का दिन है। द्वितीया तिथि गुरुवार को सुबह 9 बजकर 39 मिनट तक रहेगी, उसके बाद तृतीया तिथि लग जायेगी। 2 जुलाई को शाम 4 बजकर 40 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। वैधृति योग स्थिर कार्यों हेतु ठीक है परंतु यदि कोई भाग-दौड़ वाला कार्य अथवा यात्रा आदि करनी हो तो इस योग में नहीं करनी चाहिए। साथ ही गुरुवार को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद श्रवण नक्षत्र लग जायेगा। आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं गुरुवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
2 जुलाई 2026 का पंचांग
- आषाढ़ कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि-2 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजकर 39 मिनट तक रहेगी, उसके बाद तृतीया तिथि लग जायेगी
- वैधृति योग- 2 जुलाई 2026 को शाम 4 बजकर 40 मिनट तक
- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र-2 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद श्रवण नक्षत्र लग जायेगा।
2 जुलाई 2026 का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:39 ए एम से 05:22 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:16 पी एम से 01:09 पी एम
- विजय मुहूर्त - 02:55 पी एम से 03:48 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:19 पी एम से 07:41 पी एम
2 जुलाई 2026 का अशुभ समय
- राहुकाल- 02:22 पी एम से 04:01 पी एम
- यमगण्ड- 06:05 ए एम से 07:44 ए एम
- गुलिक काल- 09:24 ए एम से 11:03 ए एम
- विडाल योग- 06:05 ए एम से 11:13 ए एम
- वर्ज्य- 01:50 पी एम से 03:35 पी एम
- दुर्मुहूर्त- 10:30 ए एम से 11:23 ए एम
- बाण चोर- 07:27 ए एम तक
- भद्रा- 10:31 पी एम से 06:05 ए एम, जुलाई 03
राहुकाल का समय
- दिल्ली- दोपहर बाद 02:10 - 03:54 PM
- मुंबई- दोपहर 02:22 - 04:01 PM
- चंडीगढ़- दोपहर 02:12 - 03:58 PM
- लखनऊ- दोपहर 01:54 - 03:37 PM
- भोपाल- दोपहर 02:06 - 03:47 PM
- कोलकाता- दोपहर 01:22 - 03:03 PM
- अहमदाबाद- दोपहर 02:25 - 04:06 PM
- चेन्नई- दोपहर 01:49 - 03:26 PM
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय- सुबह 5:26 बजे
- सूर्यास्त- शाम 7: 22 बजे
श्रवण नक्षत्र के बारे में
श्रवण नक्षत्र आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से श्रवण 22वां नक्षत्र है। श्रवण का अर्थ होता है- सुनना। इसका प्रतीक चिन्ह कान है। साथ ही इसके चारों चरण मकर राशि में आते हैं। अतः श्रवण नक्षत्र की राशि मकर है। श्रवण नक्षत्र के दौरान राज्याभिषेक, गृह निर्माण, प्रकाशन, ध्वजारोहण और नामकरण आदि किया जाता है। इससे अच्छे फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही इस नक्षत्र को हर प्रकार की विद्या सीखने और उसे सुरक्षित रखने के साथ भी जोड़कर देखा जाता है। अत: श्रवण नक्षत्र के दौरान विद्या से जुड़ा कोई भी काम करने से वह सफल जरूर होगा।
श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्रमा हैं, जबकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार श्रवण नक्षत्र की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को माना जाता है। श्रवण नक्षत्र के जातक बुद्धिमान और सामाजिक व्यवहार में कुशल होते हैं। साथ ही ये लोग स्पष्टवादी, स्वाभिमान से भरे हुए और सहनशील होते हैं। ये नौकरी और व्यवसाय, दोनों ही क्षेत्र में सफलता पाने के काबिल होते हैं। ये चिकित्सा, तकनीक, शिक्षा और कला आदि क्षेत्रों में विशेष रुचि रखते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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