महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से बड़ी हलचल जारी है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी टूट सकती है। खबर सामने आ रही है कि उद्धव की पार्टी के 9 में से 7 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जा सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि उद्धव की पार्टी तोड़ने के लिए एकनाथ शिंदे ऑपरेशन टाइगर चला रहे हैं। इस ऑपरेशन की कमान शिंदे ने अपनी पार्टी के सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रताप जाधव और MLC कृपाल तुमाने को दी है। राज्य में जारी इन राजनीतिक अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने सांसदों की बैठक बुलाई थी। अब खबर सामने आई है कि इस बैठक में उद्धव ठाकरे का दर्द छलक पड़ा है।
क्या बोले उद्धव ठाकरे?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों की बैठक में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने पार्टी में हुई बगावत और नेताओं के पार्टी छोड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि आज भले ही उनका समय नहीं है, लेकिन भविष्य में हालात जरूर बदलेंगे। उद्धव ठाकरे ने बैठक में कहा, “आज मेरा नहीं, लेकिन कल मेरा जरूर होगा। तब तक हमें सहना पड़ेगा, संघर्ष करना पड़ेगा।” पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़ी है, उन्हें एक दिन पछतावा जरूर होगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।”
जबरदस्ती रोकने का क्या मतलब है- उद्धव
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने चार साल पहले शिवसेना में हुई बड़ी बगावत का भी जिक्र किया। उद्धव ठाकरे ने कहा- “पार्टी में बड़ी फूट पड़ी, 40 विधायक चले गए। मैं उस समय राज्य का मुख्यमंत्री था। जो बातें सभी को पता चल रही थीं, क्या मुझे पता नहीं थीं? मुझे इसकी भनक थी।” हालांकि उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी को रोकने या दबाव बनाने की कोशिश नहीं की। उद्धव ठाकरे ने कहा, “मैंने किसी पर दबाव नहीं डाला, किसी के खिलाफ फाइलें तैयार नहीं करवाईं। जो जाना चाहता है, उसे जबरदस्ती रोकने का क्या मतलब है?”
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