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मुंबई दंगों का आरोपी 32 साल बाद गिरफ्तार, वडाला इलाके से पुलिस ने पकड़ा

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Jul 06, 2025 10:59 pm IST,  Updated : Jul 06, 2025 11:57 pm IST

1993 के सांप्रदायिक दंगों के बाद, वडाला पुलिस थाने में खान के खिलाफ हत्या के प्रयास, गैरकानूनी ढंग से एकत्र होने और अन्य अपराधों से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

arrested- India TV Hindi
गिरफ्तार Image Source : FILE

मुंबई: मुंबई पुलिस को लंबे अर्से बाद एक आरोपी को गिरफ्तारी करने में सफलता मिली है। 1993 में मुंबईमें हुए सांप्रदायिक दंगों के मामले में पिछले 32 वर्षों से फरार एक आरोपी को वडाला इलाके से गिरफ्तार किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। वडाला पुलिस थाने के अधिकारी ने उसकी पहचान आरिफ अली हशमुल्ला खान (54) के रूप में की। 

कोर्ट ने घोषित किया था भगोड़ा

अधिकारी ने बताया, ‘‘1993 के सांप्रदायिक दंगों के बाद, वडाला पुलिस थाने में खान के खिलाफ हत्या के प्रयास, गैरकानूनी ढंग से एकत्र होने और अन्य अपराधों से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसे बाद में स्थानीय अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस की एक टीम उत्तर प्रदेश गई, जहां वह मूल रूप से रहता है। वहां से मिले सुरागों और एक विशेष सूचना के आधार पर हमने शनिवार को वडाला ईस्ट के दीन बंधु नगर से खान को गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।’

1993 के मुंबई दंगे

मुंबई में हुए सांप्रदायिक दंगे भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। इन दंगों ने न केवल शहर को हफ्तों तक हिंसा की आग में झुलसाए रखा, बल्कि इसके सामाजिक ताने-बाने पर भी गहरा असर छोड़ा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन दंगों में करीब 900 लोग मारे गए और 2,000 से अधिक घायल हुए, हालांकि अनौपचारिक आंकड़े इससे कहीं अधिक होने का दावा करते हैं।

दंगों की पृष्ठभूमि और तात्कालिक कारण

इन दंगों की चिंगारी 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद भड़की। इस घटना के विरोध में मुंबई के मुस्लिम बहुल इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए, जो कुछ ही समय में हिंसक हो गए। मुंबई दंगों के दौरान हिंसा का दो दौर देखने को मिला। बाबरी मस्जिद गिरने के बाद हिंसा का पहला दौर हुआ। धारावी, भिंडी बाजार, डोंगरी और नागपाड़ा जैसे इलाके सबसे पहले प्रभावित हुए। इसके बाद जनवरी 1993 में एक बार फिर हिंसा शुरू हो गई। माहिम, ग्रांट रोड, भांडुप और जोगेश्वरी जैसे इलाके बुरी तरह से प्रभावित हुए। शिवसेना की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे।

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