राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि अपने देश का निर्माण और सुधार सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। ऐसा करने से अंततः उनके अपने हितों की रक्षा होती है। नागपुर में एक पुस्तक विमोचन समारोह में उन्होंने कहा, 'अपने देश का निर्माण और उसे बेहतर बनाना हमारा कर्तव्य है। ऐसा करके हम अपने हितों की रक्षा करते हैं। जो देश अच्छा प्रदर्शन करता है, वह दुनिया भर में सुरक्षित और सम्मानित होता है।'
हेडगेवार ने इसलिए की नागपुर में RSS की स्थापना
आरएसएस की उत्पत्ति का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि डॉक्टर केशव हेडगेवार ने नागपुर में इस संगठन की स्थापना की क्योंकि इस शहर में पहले से ही निस्वार्थ सेवा और सामाजिक जागरूकता की भावना विद्यमान थी। उन्होंने कहा कि आरएसएस पूरे देश और हिंदू समाज के लिए काम करता है। उन्होंने आगे कहा कि नागपुर अपने स्वयंसेवकों के लिए एक विशेष स्थान रखता है, लेकिन यह किसी विशेष दर्जे का दावा नहीं करता।
'ईश्वर, धर्म और राष्ट्र'
भागवत ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने 'स्वराज्य' (स्वशासन या स्वतंत्र राज्य) प्राप्त करने के अपने प्रयास व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि के लिए शुरू किए थे।
जब शिवाजी ने की स्वराज्य की स्थापना
आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'जब शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना शुरू की तो उन्होंने अपने मित्रों को अपने लिए नहीं बल्कि एक बड़े उद्देश्य के लिए इकट्ठा किया। उनकी एकता की भावना ने लोगों को शक्ति प्रदान की। जब तक उनके आदर्शों ने समाज को प्रेरित किया उस काल का इतिहास प्रगति और विकास को प्रतिबिम्बित करता रहा।'
शिवाजी महाराज का दृष्टिकोण
उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के दृष्टिकोण ने देश भर के शासकों और स्वतंत्रता सेनानियों को प्रभावित किया और यहां तक कि 1857 के विद्रोह को भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने व्यवस्थित रूप से उन प्रेरणादायक भारतीय प्रतीकों को नष्ट करने का प्रयास किया, जिन्होंने लोगों को एकजुट किया था और प्रतिरोध की भावना को मजबूत किया था।
शांति और समृद्धि का देश
उन्होंने आगे कहा, 'हमें अपने अतीत से लोगों ने समाज की भलाई के लिए निस्वार्थ भाव से कैसे संघर्ष किया, यह सीखने की जरूरत है। हमारे इतिहास में भारत को शांति और समृद्धि का देश बनाने की पर्याप्त शक्ति है जो विश्व में योगदान दे।'