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नॉर्मल बाइक से कितनी अलग है फ्लेक्स-फ्यूल बाइक? क्या सच में आधा हो जाएगा पेट्रोल का खर्च; जानें हर एक डिटेल्स

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jun 05, 2026 12:51 pm IST,  Updated : Jun 05, 2026 01:25 pm IST

फ्लेक्स-फ्यूल बाइक क्या होती है, यह नॉर्मल पेट्रोल वाली बाइक से कितनी अलग है और क्या इससे सच में पेट्रोल का खर्च कम हो सकता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।

नॉर्मल बाइक और...- India TV Hindi
नॉर्मल बाइक और फ्लेक्स फ्यूल बाइक में अंतर Image Source : POSTED ON X BY @HEROMOTOCORP

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पर्यावरण के अनुकूल और जेब पर हल्की पड़ने वाली फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी को लेकर हलचल तेज हो गई है। देश की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने बीते 3 जून को भारतीय बाजार में अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकल को लॉन्च कर दिया है। हीरो ने स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वेरिएंट्स को पेश किया है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर फ्लेक्स-फ्यूल बाइक क्या होती है? यह नॉर्लम बाइक से कितनी अलग है और क्या इससे सच में पेट्रोल का खर्च कम हो सकता है? आइए समझते हैं।

नॉर्मल पेट्रोल बाइक से कितनी अलग है फ्लेक्स-फ्यूल बाइक?

आमतौर पर हमारी सड़कों पर दौड़ने वाली नॉर्मल बाइक्स पूरी तरह से 100% पेट्रोल पर चलती हैं। लेकिन हीरो की यह नई फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली बाइक सामान्य पेट्रोल के साथ-साथ इथेनॉल के मिश्रण पर भी आसानी से दौड़ सकती है। इस बाइक का इंजन इतना एडवांस है कि इसमें आप 20 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत (E100) तक इथेनॉल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी अगर आपको पेट्रोल की जगह पूरी तरह इथेनॉल भी डालना पड़े, तो यह बाइक बिना किसी रुकावट के स्मूथ परफॉर्मेंस देगी।

फ्लेक्स-फ्यूल इंजन में किए 3 खास बदलाव

नॉर्मल इंजन में यदि सीधे इथेनॉल डाला जाए, तो उसमें जंग लगने और परफॉर्मेंस बिगड़ने का खतरा रहता है। इसी वजह से हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स के इन वेरिएंट्स में विशेष तकनीकी अपग्रेड किए हैं:

  • स्मार्ट फ्यूल सेंसर: इसके इंजन में एक विशेष फ्यूल कंपोजीशन सेंसर लगाया गया है, जो फ्यूल टैंक में पेट्रोल और इथेनॉल के अनुपात को खुद-ब-खुद भांप लेता है और इंजन की सेटिंग को उसी हिसाब से एडजस्ट कर देता है।
  • एंटी-कोरोसिव कोटिंग: इथेनॉल में हल्की नमी होती है, जिससे पाइप और टैंक खराब हो सकते हैं। इसे रोकने के लिए बाइक के फ्यूल पंप, इंजेक्टर्स और फ्यूल टैंक के अंदरूनी हिस्सों पर विशेष कोटिंग की गई है।
  • एडवांस्ड ECU: इंजन की हीटिंग और स्पार्क प्लग की टाइमिंग को कंट्रोल करने के लिए इसमें नई पीढ़ी का इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) सॉफ्टवेयर दिया गया है।

आम जनता को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

  • स्प्लेंडर और एचएफ डीलक्स अपनी शानदार माइलेज के लिए ही जानी जाती हैं। फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के साथ भी कंपनी ने इनके माइलेज और पिकअप को बरकरार रखने का दावा किया है।
  • इथेनॉल पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल ईंधन है, जो गन्ने और अनाज के अवशेषों से बनता है। इससे कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है, जिससे शहरों को प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी।

क्या आधा हो जाएगा पेट्रोल का खर्च?

फ्लेक्स-फ्यूल बाइक से पेट्रोल का खर्च आधा तो नहीं होगा, लेकिन नॉर्मल बाइक में e-20 पेट्रोल से होने वाले कुछ नुकसानों से बचा जा सकता है। आपको बता दें कि देश भर के सारे पेट्रोल पंप में सरकार ने e-20 पेट्रोल को अनिवार्य कर दिया है। इथेनॉल हमारे देश के किसानों द्वारा गन्ने और अनाज से तैयार किया जाता है, इसलिए इसका फायदा देश की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा।

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