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एसएमई के लिए एकाउंटिंग जैसे जटिल विषय को बिजी ने बना दिया सरल, देश में ही नहीं विदेशों में भी हैं ग्राहक

कड़ी मेहनत और कभी हार न मानने की ललक का नतीजा है बिजी। बिजी एक एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर है, जो देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी व्‍यापारियों के लिए जटिल माने जाने वाले एकाउंटिंग को सरल बनाने में मदद कर रहा है।

Edited by: India TV Paisa Desk
Published : Jun 09, 2018 04:06 pm IST, Updated : Jun 09, 2018 04:06 pm IST
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नई दिल्‍ली। कड़ी मेहनत और कभी हार न मानने की ललक का नतीजा है बिजी। बिजी एक एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर है, जो देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी व्‍यापारियों के लिए जटिल माने जाने वाले एकाउंटिंग को सरल बनाने में मदद कर रहा है। बिजी के शुरू होने की कहानी भी बड़ी रोचक है। दो भाइयों की मेहनत और लगन का ही यह नतीजा है कि 6200 रुपए के शुरुआती निवेश के साथ शुरू किया गया ये काम अब सालाना 62 करोड़ रुपए का कारोबार करता है।

बिजी इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड की स्‍थापना दिनेश गुप्‍ता और उनके छोटे भाई राजेश गुप्‍ता ने 12 अगस्‍त 1997 में की थी। दिनेश गुप्‍ता ने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेज से बी-टेक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्‍हें दिल्‍ली में एक आईटी कंपनी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट विभाग में नौकरी मिल गई। नौकरी में उनका मन तो लगता था लेकिन उनका सपना अपना काम शुरू करने का था। नौकरी करते हुए कई बार कोशिश के बावजूद सफलता नहीं मिली। एक दिन अचानक दिनेश गुप्‍ता एक सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए और 4-5 महीने के लिए बिस्‍तर पर आ गए।

बीमारी की अवस्‍था में गुप्‍ता अपना ज्‍यादातर समय कम्प्यूटर पर बिताते थे। कम्प्यूटर पर बढ़ती निर्भरता से उन्‍होंने यह तय किया कि वह इससे जुड़ा कुछ काम शुरू करेंगे। उनकी प्‍लानिंग कस्‍टमाइज्‍ड सॉफ्टवेयर बनाने की थी। उनकी इस योजना में उनके छोटे भाई राजेश ने बहुत सहयोग किया। दिल्ली के पीथमपुरा इलाके में एक पुराने कम्‍प्‍यूटर से काम की शुरुआत की।

कई महीनों की कोशिश के बाद बिजी को मलेशिया की एक रेस्‍टॉरेंट चेन चलाने वाली कंपनी से कस्‍टमाइज्‍ड सॉफ्टवेयर बनाने का ऑर्डर और एडवांस मिला। जब एक साल बाद सॉफ्टवेयर डिलीवरी का समय आया तब कंपनी ने इसे लेने व बकाया पेमेंट देने से इनकार कर दिया। शुरुआती असफलता भी गुप्‍ता बंधुओं का भरोसा डिगा नहीं पाई। इसके बाद उन्‍होंने एक नया एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर बनाया। सॉफ्टवेयर तो बन गया लेकिन अब समस्‍या इसे बाजार में बेचने की थी। क्‍योंकि उस समय बाजार में पहले से ही एक मजबूत एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर मौजूद था।

इसका तोड़ भी गुप्‍ता बंधुओं ने जल्‍द ही निकाल लिया। उन्‍होंने अपने उपभोक्‍ताओं से रूबरू हो उनकी एकाउंटिंग जरूरतों को समझा और उसके अनुरूप अपने सॉफ्टवेयर को रिडिजाइन किया। उपभोक्‍ताओं को एक ऐसे सॉफ्टवेयर की तलाश थी, जो एकाउंटिंग के साथ ही साथ बिजनेस मैनेज और सेल्‍स टैक्‍स रिपोर्ट व इनवॉइस आदि बनाने में भी उनकी मदद कर सके। ये सभी फीचर्स बिजी सॉफ्टवेयर में जोड़कर गुप्‍ता बंधुओं ने अपने उपभोक्‍ताओं के लिए एकाउंटिंग को एक आसान विषय बना दिया।

आज बिजी इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड के पास 6 लाख ग्राहक हैं। यह सॉफ्टवेयर जीएसटी रेडी है और जीएसटी में भी लोगों की काफी मदद कर रहा है। इसके कर्मचारियों की संख्‍या 150 है और इसके ग्राहक भारत के अलावा दक्षिण एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्‍ट के 20 से अधिक देशों में फैले हुए हैं।

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