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सोमवार आने के साथ ही बढ़ा साइबर हमले का खतरा, कारोबारियों और संस्‍थानों के छूट रहे पसीने

 Written By: Manish Mishra
 Published : May 15, 2017 10:22 am IST,  Updated : May 15, 2017 11:13 am IST

सुरक्षा एजेंसियों ने आगाह किया है कि सोमवार को दुनिया भर में दो लाख से ज्यादा कंपनियों और लोगों को शिकार बनाने वाला साइबर हमला नए संकट का रूप ले सकता है।

सोमवार आने के साथ ही बढ़ा साइबर हमले का खतरा, कारोबारियों और संस्‍थानों के छूट रहे पसीने- India TV Hindi
सोमवार आने के साथ ही बढ़ा साइबर हमले का खतरा, कारोबारियों और संस्‍थानों के छूट रहे पसीने

लंदन सुरक्षा एजेंसियों ने आगाह किया है कि सोमवार को कार्य-सप्ताह शुरू होने पर दुनिया भर में दो लाख से ज्यादा कंपनियों और लोगों को शिकार बनाने वाला साइबर हमला नए संकट का रूप ले सकता है और इसके हमले के शिकारों की तादाद में इजाफा हो सकता है। यह अभी तक दुनिया का सबसे बड़ा साइबर हमला है जिसमें अपराधियों ने दुनिया के 150 से भी ज्यादा देशों में अपना कहर ढाया है। साइबर हमले के सरगना फिरौती वसूल रहे हैं।

बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन के सिक्योरिटी रिसर्चर ‘मैलवेयर टेक’ ने भविष्यवाणी की कि सोमवार को दूसरा हमला होने की आशंका है। मैलवेयर टेक ने रैनसमवेयर हमले को सीमित करने में मदद की। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए एक डोमेन का रजिस्ट्रेशन कराए जाने के बाद मैलवेयर टेक का ‘आकस्मिक हीरो’ के तौर पर स्वागत किया गया। मैलवेयर टेक अपनी पहचान नहीं जाहिर करना चाहता।

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शुक्रवार को शुरू हुए साइबर हमले की शिकार हुईं ये कंपनियां

साइबर हमलों का यह सिलसिला शुक्रवार को शुरू हुआ और इसने बैंकों से ले कर अस्पताल तक और निजी कंपनियों से ले कर सरकारी एजेंसियों तक सबको धड़ाधड़ अपना निशाना बनाया। इसने माइक्रोसॉफ्ट की पुरानी ऑपरेटिंग सिस्टम की कमजोरियों को फायदा उठाया। इन साइबर हमलों की जद में आने वालों में अमेरिकी कूरियर कंपनी फेडएक्स, यूरोपीय कार कंपनियां, स्पेनी दूरसंचार दिग्गज टेलीफोनिका, ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा और जर्मनी का ड्योश रेल नेटवर्क प्रमुख हैं।

IT मंत्रालय वेबकास्‍ट के जरिए फैला रहा है जागरूकता

भारत का सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय रैनसमवेयर से खतरे को देखते हुए आज एक वेबकास्‍ट के जरिए सबसे खतरनाक साइबर हमले के बारे में जागरूक करने जा रहा है। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि यह वेबकास्‍ट CERT-In द्वारा ‘Prevention of WannaCry Ransomware Threat’ पर सोमवार को 11 बजे सुबह प्रसारित किया जाएगा। इसे देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें https://webcast.gov.in/cert-in/

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आज से हालात और बिगड़ने के हैं आसार

यूरोपीय संघ की पुलिस एजेंसी यूरोपोल के कार्यकारी निदेशक रॉब वेनराइट ने कहा है कि सप्ताहांत की छुट्टियां गुजार कर सोमवार को जब कर्मी अपने दफ्तर लौटेंगे और अपने अपने कंप्यूटरों पर लॉग-इन करेंगे तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

वेनराइट ने ब्रिटेन के आईटीवी टेलीविजन के साथ एक साक्षात्कार में हमले के दायरे को अभूतपूर्व करार देते हुए कहा,  हमने इस तरह की कोई चीज पहले कभी नहीं देखी थी। यूरोपोल के कार्यकारी निदेशक ने साइबर हमलों को बढ़ता खतरा करार दिया और कहा, मैं चिंतित हूं कि कैसे जब लोग काम पर जाएंगे और अपनी मशीनें चालू करेंगे तो संख्या किस तरह बढ़ेगी।

रेनॉ ने सोमवार को बंद किया अपना ऑफिस

ब्रिटेन के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर ने वेनराइट के इन अंदेशों की हिमायत की और कहा, एक नया कार्य-सप्ताह शुरू हो रहा है और आशंका है कि ब्रिटेन में, और दूसरी जगहों पर रैनसमवेयर के और मामले प्रकाश में आएं और शायद बड़े पैमाने पर आएं। सूत्रों ने बताया है कि इन साइबर हमलों के मद्देनजर ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी रेनो की उत्तर फ्रांस के दोउआइ में स्थित फैक्टरी सोमवार को नहीं खुलेगी।

बिटक्‍वाइन में मांगते हैं फिरौती

साइबर हमलों के पीडि़तों के कंप्यूटर स्क्रीन पर तस्वीरें आ जाती हैं जिनमें संदेश होता है, उफ्फ, आपकी फाइलें इनक्रिप्ट कर दी गई हैं। पीडि़तों से आभासी दुनिया की मुद्रा बिटक्वाइन में 300 डॉलर की फिरौती मांगी जाती है।स्क्रीन पर आए संदेशों में कहा जाता है कि पीडि़त यह रकम तीन दिन के अंदर चुका दे वरना फिरौती की रकम दुगुनी कर दी जाएगी। फिरौती नहीं देने पर लॉक की गई फाइलें डिलीट कर दी जाएंगी। उल्लेखनीय है कि बिटक्वाइन दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली आभासी मुद्रा है। इसका लेन देन बेनाम तरीके से अत्याधिक इनक्रिप्टेड कोड से किया जा सकता है और किसी को इसकी भनक भी नहीं लगती ।

विशेषज्ञों और सरकारों दोनों ने ही पीडि़तों से कहा है कि वे फिरौती की अपराधियों की मांग नहीं मानें। वेनराइट के अनुसार अभी तक बहुत कम पीडि़तों ने फिरौती दी है।

सुरक्षा कंपनी डिजिटल शैडोज ने कल कहा था कि रैनसमवेयर ने जिन बिटक्वाइन पतों का इस्तेमाल किया है उनके मार्फत बस 32 हजार डॉलर या साढ़े 20 लाख रुपए का लेनदेन हुआ है। मॉस्को स्थित कंप्यूटर सुरक्षा कंपनी कास्‍परस्‍की लैब का कहना है कि अपराधियों ने जिन डिजिटल कोड का उपयोग किया है, माना जाता है कि उसे अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी ने विकसित किया था। इसे बाद में डॉक्यूमेंट डंप के रूप में लीक कर दिया गया था।

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