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दूरसंचार विभाग ने मोबाइल कंटेंट डाउनलोडिंग के लिए 20 हजार रुपए की लिमिट तय की

 Written By: Ankit Tyagi
 Published : Apr 19, 2017 07:42 am IST,  Updated : Apr 19, 2017 07:55 am IST

दूरसंचार विभाग ने कहा कि मोबाइल कंटेंट डाउनलोड करने पर कोई भी उपभोक्ता अब 20 हजार रुपए से ज्यादा का पेमेंट अपने प्रीपेड, पोस्टपेड बिल के जरिए नहीं कर सकेगा।

दूरसंचार विभाग ने मोबाइल कंटेंट डाउनलोडिंग के लिए 20 हजार रुपए की लिमिट तय की- India TV Hindi
दूरसंचार विभाग ने मोबाइल कंटेंट डाउनलोडिंग के लिए 20 हजार रुपए की लिमिट तय की

नई दिल्ली। दूरसंचार विभाग ने मंगलवार को कहा कि मोबाइल कंटेंट डाउनलोड करने पर कोई भी मोबाइल उपभोक्ता अब 20 हजार रुपए से ज्यादा का पेमेंट अपने प्रीपेड या पोस्टपेड बिल के जरिए नहीं कर सकेगा। इसका मतलब साफ है कि  मोबाइल फोन इस्‍तेमाल करने वाले अब एक बार में 20 हजार रुपए से ज्‍यादा का भुगतान किसी सर्विस को लेने में या कंटेंट डाउनलोड करने के लिए नहीं कर सकेंगे। यह प्रतिबंध प्री-पेड और पोस्‍ट पेड मोबाइल दोनों पर लागू होंगे।

20 हजार रुपए से ज्‍यादा की खरीदारी पर रोक

विभाग ने एक आदेश में कहा कि अब मोबाइल उपयोक्ता अपने फोन से सभी शुल्क वाली पेड डिजिटल सामग्री को डाउनलोड कर सकते हैं और इसके लिए अपने प्रीपेड बैलेंस और पोस्टपेड बिल भुगतान प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं लेकिन इसके तहत हर बार अधिकतम 20,000 रुपए तक का ही भुगतान किया जा सकता है। यह भी पढ़े: 8 राज्‍यों में अब हर रविवार को बंद रहेंगे पेट्रोल पंप, ईंधन बचाने के‍ लिए 14 मई से होगी शुरुआत

क्यों दिया ये आदेश

दूरसंचार विभाग ने कहा है कि  ग्राहक एक बार में 20 हजार रुपए से ज्‍यादा का डिजिटल कंटेंट अपने मोबाइल फोन से नहीं खरीद सकेंगे। ऐसी खरीदारी वह ग्राहक आमतौर पर करते हैं जिनके पास क्रेडिट या डेबिट कार्ड नहीं होते हैं और नेट बैंकिंग भी वह लोग इस्‍तेमाल नहीं करते हैं। यह भी पढ़े: सामान्य मानसून से कृषि जीडीपी की वृद्धि दर 3-4 प्रतिशत रहने का अनुमान, किसानों की बढ़ेगी आय

टेलिकाम कंपनियों को भी दिए निर्देश

विभाग ने टेलिकॉम कंपनियों से कहा है कि इस तरह के भुगतान को उनको अपनी एडजेस्‍टेड ग्रोस रेवेन्‍यु (एजीआर) में दिखाना होगा। डिजिटल कंटेंट से होने वाली आय को पास थ्रो रेवेन्‍यु नहीं माना जाएगा। इसको एजीआर में दिखाना होगा और इस पर लाइसेंस फीस और स्‍पेक्‍ट्रम चार्ज लिया जाएगा। देश में टेलिकॉम आपरेटर एजीआर पर ही सरकार को स्‍पेक्‍ट्रम फीस चुकाते हैं।

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