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Lots of Mallya: सरकारी बैंकों का डूब गया 1.14 लाख करोड़, लोन लेकर वापस न करने वालों की बढ़ी संख्‍या

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Feb 08, 2016 01:47 pm IST,  Updated : Feb 08, 2016 02:18 pm IST

2013 से 2015 के वित्तीय वर्षों के दौरान 29 बैंकों ने करीब 1.14 लाख करोड़ लोन दिया है, जिसे लोग चुकाने के मूड में नहीं है। दूसरे शब्दों में पैसे डूब गए हैं।

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Lots of Mallya: सरकारी बैंकों का डूब गया 1.14 लाख करोड़, लोन लेकर वापस न करने वालों की बढ़ी संख्‍या

नई दिल्ली। देश के सरकारी बैंकों  से लिया गया लोन चुकाने में अब लोग आनाकानी कर रहे हैं। 29 सरकारी बैंकों से दिए गए लोन का जो आंकड़ा सामने आया है, वह हैरान करने वाला है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्‍त वर्ष 2013 से 2015 के बीच बैंकों से करीब 1.14 लाख करोड़ रुपए लोन के तौर पर दिए गए, जिसकी वापसी की उम्मीद अब न के बराबर है। यह रकम बैंकों के बीते 9 साल के रिकॉर्ड से कई गुना ज्यादा है।

ऑल इंडिया बैंक एम्‍प्‍लॉई एसोसिएशन(एआईबीईए) ने जून 2014 में देश के टॉप 50 लोन डिफॉल्‍टर्स की एक लिस्‍ट जारी की थी,‍ जिसमें से अधिकांश डिफॉल्‍टर्स कॉरपोरेट कंपनियां हैं। इन कंपनियों पर बैंकों का कु 40,528 करोड़ रुपया बकाया है। इस लिस्‍ट के मुताबिक सबसे बड़ी डिफॉल्‍टर कंपनी विजय माल्‍या की कंपनी किंगफि‍शर एयरलाइंस हैं। इस‍ लिस्‍ट के मुताबिक मोजर बियर इंडिया लिमिटेड एंड ग्रुप कंपनियों पर 581 करोड़, सेंचुरी कम्‍यूनिकेशन लिमिटेड पर 624 करोड़, इंडियन टेकनोमैक पर 629 करोड़, आईसीएसए(इंडिया) पर 646 करोड़ और डेक्‍कान क्रोनिकल होल्डिंग्‍स लिमिटेड पर 700 करोड़ रुपए का लोन बकाया है।

करीब 15,551 करोड़ रुपए वापस आने की उम्मीद नहीं

एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, वित्‍त वर्ष 2012 की समाप्ति पर आरबीआई के आंकड़ों से पता चला था कि कर्ज के तौर पर दिए गए बैंकों के करीब 15,551 करोड़ रुपए वापस आने की उम्मीद नहीं हैं। मार्च 2015 तक यह आंकड़ा तीन गुना बढ़कर 52,542 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। बैंकों से कर्ज लेकर वापस न करने वालों में कौन लोग शामिल हैं, ये इंडीविजुअल्‍स हैं या फि‍र कोई बिजनेसमैन और उन्होंने अब तक बैंकों को कितना घाटा पहुंचाया है, इस संबंध में आरबीआई ने कहा कि कर्ज लेकर वापस न करने वालों में सबसे बड़ा नाम किसका है इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है, क्योंकि बैंक डूबे हुए पैसों का संयुक्त आंकड़ा ही पेश करते हैं।

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सिर्फ दो बैंकों का पैसा नहीं डूबा, 85 फीसदी तक बढ़े मामले

सरकार पब्लिक सेक्टर के बैंकों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है तो वहीं डूबता पैसा उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत है। बीते पांच सालों में सिर्फ दो बैंकों स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र और स्टेट बैंक ऑफ इंदौर ने ऐसा कोई लोन पास नहीं किया है, जिसमें पैसा डूब गया हो। दूसरी ओर आंकड़ों के मुताबिक, साल 2004 से 2015 के बीच करीब कर्ज के रूप में दिए गए बैंकों के 2.11 लाख करोड़ रुपए डूब गए। ऐसे आधे से ज्यादा लोन (1,14,182 करोड़ रुपये) साल 2013 से 2015 के बीच में लिए गए हैं। वहीं साल 2004 से 2012 के बीच इस तरह के लोन का आंकड़ा 4 फीसदी था, जो 2013 से 2015 के बीच बढ़कर 60 फीसदी हो गया।

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