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इस राज्य में धरोहर वाले 18 स्थानों ने 2024 में 37 लाख पर्यटकों को किया आकर्षित, खूब मिले रोजगार

 Published : Apr 17, 2025 08:54 pm IST,  Updated : Apr 17, 2025 08:54 pm IST

पर्यटकों में भारतीय और विदेशी दोनों ही शामिल थे। इन 18 स्थलों में से, अकेले चार यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों ने 12. 88 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया।

अकेले चार यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों ने 12. 88 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया। - India TV Hindi
अकेले चार यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों ने 12. 88 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया। Image Source : @BHARATONTHERISE

खास और शानदार लोकेशन पर्यटकों को अपनी तरफ खींच ही लेते हैं। ऐसा ही गुजरात में हुआ है। गुजरात सरकार ने गुरुवार को बताया कि साल 2024 में 36. 95 लाख से अधिक पर्यटकों ने गुजरात के 18 विरासत स्थलों (धरोहर वाले स्थान) का दौरा किया। पीटीआई की खबर के मुताबिक, इन पर्यटकों में भारतीय और विदेशी दोनों ही शामिल थे। इन 18 स्थलों में से, अकेले चार यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों ने 12. 88 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि पर्यटकों की आवक से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला और रोजगार पैदा हुए।

7.15 लाख से अधिक पर्यटक अहमदाबाद आए

खबर के मुताबिक, सरकार ने अपने आंकड़ों के हवाले से बताया कि हेरिटेज सिटी अहमदाबाद में 7.15 लाख से अधिक पर्यटकों ने दौरा किया, पाटन में रानी की वाव बावड़ी में 3.64 लाख पर्यटकों ने दौरा किया, कच्छ में धोलावीरा में 1.6 लाख से अधिक पर्यटकों ने दौरा किया और पंचमहल जिले में चंपानेर में 47,000 पर्यटकों ने दौरा किया। इन चार स्थानों को वास्तुकला की विशिष्टता, इतिहास, जल प्रबंधन और कला और नगर नियोजन जैसी विशेषताओं के लिए यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया है। चंपानेर और उससे सटे पावागढ़ को 2004 में विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था।

कालिका माता का मंदिर है काफी पुराना

खबर के मुताबिक, पावागढ़ पहाड़ी पर स्थित कालिका माता का मंदिर आठवीं शताब्दी के शासक वनराज चावड़ा द्वारा निर्मित 'शक्तिपीठों' में से एक है। चावड़ा की सेना के सेनापति चंपानेर के नाम पर चंपानेर का नाम रखा गया था। रांकी वाव या रानी की वाव उत्तर गुजरात के पाटन जिले में स्थित है। इस ऐतिहासिक बावड़ी का निर्माण 11वीं शताब्दी के आखिर में अन्हिलवाड़ पाटन के सोलंकी वंश के राजा मूलराज सोलंकी के पुत्र भीमदेव की पहली रानी उदयमती ने करवाया था। 2014 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया। बावड़ी की जमीन के नीचे सात मंजिलें हैं, जो पत्थर की नक्काशी और देवी-देवताओं की मूर्तियों से सजी हैं।

भारत का पहला विश्व धरोहर शहर

साल 2017 में यूनेस्को ने साबरमती नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित अहमदाबाद के चारदीवारी शहर को भारत के पहले विश्व धरोहर शहर का दर्जा दिया। कच्छ जिले में हड़प्पा युग के पुरातत्व स्थल धोलावीरा को 2021 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। इसको लेकर ऐसा कहा जाता है कि यह 5,000 साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता का हिस्सा है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस स्थल को बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं के विकास के लिए केंद्र की 'स्वदेश दर्शन 2' योजना के तहत चुना गया है, साथ ही द्वारका को भी इसी योजना के तहत चुना गया है। राज्य सरकार की विरासत पर्यटन नीति 2020-25 के तहत गुजरात के गांवों और कस्बों में स्थित विरासत भवनों, महलों और किलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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