देश के प्रमुख मजदूर संगठनों CITU, AIAWU और अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौतों का कड़ा विरोध किया है। इन संगठनों ने शुक्रवार को कहा कि ये समझौते देश की कृषि, उद्योग, रोजगार और नीतिगत स्वायत्तता के लिए खतरा हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU), अखिल भारतीय किसान सभा और अखिल भारतीय कृषि श्रमिक संघ (AIAWU) ने 12 फरवरी की आम हड़ताल से पहले दिल्ली में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया।
मजदूरों और किसानों से बड़े पैमाने पर हड़ताल में हिस्सा लेने की अपील
अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव विजू कृष्णन, सीटू के महासचिव ई. करीम और भारतीय कृषि श्रमिक संघ के महासचिव (AIAWU) बी. वेंकट ने देश के मजदूरों, किसानों और खेतिहर एवं ग्रामीण मजदूरों से इस हड़ताल में बड़े पैमाने पर हिस्सा लेने का आह्वान किया है। उन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट प्रतिरोध को तेज करने की जरूरत पर जोर दिया और इन नीतियों को मजदूर के अधिकारों, किसानों की आजीविका, सार्वजनिक संपत्ति और राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला करार दिया। केंद्रीय श्रमिक संगठनों (CTU) और क्षेत्रीय संघों के संयुक्त मंच ने श्रम संहिता को लागू करने और इन व्यापार समझौतों के खिलाफ 12 फरवरी को एक दिन की आम हड़ताल का आह्वान किया है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने भी हड़ताल को दिया समर्थन
12 फरवरी को होने जा रही इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और कृषि श्रमिक संगठनों के मंच ने भी समर्थन दिया है। इन संगठनों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और विकसित भारत-रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) योजना को वापस लेने सहित अपनी कई मांगों को दोहराया है। इन संगठनों ने आम बजट 2026-27 की भी आलोचना की है और इसे जनविरोधी एवं कॉरपोरेट क्षेत्र का समर्थक करार दिया।



































