USFDA (अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन) ने डाबर इंडिया के प्लांट में गंभीर कमियां होने का दावा किया है। यूएसएफडीए ने डाबर इंडिया के दादर और नगर हवेली में स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में मेंटनेंस, डेटा इंटीग्रिटी और मैन्युफैक्चरिंग की कमियों को सामने रखा है। यूएसएफडीए का कहना है कि कंपनी में कुछ फर्जी मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड्स बनाए गए ताकि ये छुपाया जा सके कि अनुमति वाले प्रोडक्ट्स के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स के लिए भी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
रॉ मटेरियल वेयरहाउस में मिली पक्षियों की बीट
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आगे बताया कि रॉ मटेरियल वेयरहाउस में पक्षियों के बीट मिले, जो पैकेजिंग मेटेरियल के पास ही थे। कंपनी के रिकॉर्ड्स में सैंपल्स पास बताए गए, लेकिन FDA इंस्पेक्टर्स को सैंपल्स में कॉन्टामिनेश मिला। आपको बता दें कि ये जांच जनवरी 2026 में की गई थी, क्योंकि अमेरिका के बाजार में डाबर आयुर्वेदिक और हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स की बड़ी खेप सप्लाई होती है। यही वजह है कि यूएसएफडीए की ये रिपोर्ट सामने आने के बाद डाबर के शेयरों में आज 4 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई। हालांकि, कारोबार के अंत में कंपनी के शेयर बीएसई पर मामूली बढ़त लेकर बंद हुए थे।
मंगलवार को डाबर के शेयरों में दिखी बड़ी गिरावट
मंगलवार को बीएसई पर डाबर इंडिया के शेयर गिरावट के साथ 420.35 रुपये के लेवल पर खुले थे। आज कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर 419.90 रुपये के इंट्राडे लो से लेकर 426.80 रुपये के इंट्राडे हाई तक पहुंचे थे। बताते चलें कि बीएसई पर कंपनी के शेयरों का 52 वीक लो 401.05 रुपये और 52 वीक हाई 576.80 रुपये है।
डाबर इंडिया ने जारी किया बयान
USFDA की ओर से डाबर इंडिया पर लगाए गए आरोपों पर कंपनी की प्रतिक्रिया भी आ गई है। डाबर की ओर से इस मामले में, शेयर बाजार को लिखित बयान दिया है। डाबर इंडिया ने अपने बयान में कहा कि सिलवासा प्लांट में एक्सपोर्ट के लिए पेट्रोलियम जेली बनाई जाती है। यहां पर जनवरी 2026 में USFDA की एक टीम आयी थी। उन्हें प्लांट के एक हिस्से में पक्षियों की बीट मिली थी, लेकिन ये प्रोडक्शन इलाके से काफी दूर था। डाबर का कहना है कि USFDA की जांच में किसी भी प्रोडक्ट में कोई खामी नहीं पाई गई। इसके साथ ही डाबर ने भरोसा दिलाया है कि USFDA ने जो भी सुझाव दिए थे, कंपनी उसका पूरी तरह से पालन कर रही है।