Wednesday, February 04, 2026
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EPF के ब्याज पर चलेगी सरकार की कैंची? प्राइवेट नौकरी वालों के रिटायरमेंट फंड पर मंडराया खतरा!

देश के करोड़ों प्राइवेट नौकरी करने वालों के लिए आने वाले दिन राहत के नहीं बल्कि चिंता बढ़ाने वाले हो सकते हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ (EPF) की ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर उन लोगों के रिटायरमेंट फंड पर पड़ेगा।

Edited By: Shivendra Singh
Published : Feb 04, 2026 10:33 pm IST, Updated : Feb 04, 2026 10:33 pm IST
सरकार EPF ब्याज दर घटाने...- India TV Paisa
Photo:EPFO सरकार EPF ब्याज दर घटाने पर कर रही विचार

प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले करोड़ों लोगों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है। जिस पीएफ को सुरक्षित भविष्य और रिटायरमेंट की मजबूत नींव माना जाता है, उसी पर अब ब्याज दर घटने का खतरा मंडरा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF की ब्याज दर में कटौती पर विचार कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो सीधे तौर पर नौकरीपेशा वर्ग की बचत और रिटायरमेंट प्लानिंग पर असर पड़ेगा।

मार्च में होगा बड़ा फैसला

EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक मार्च के पहले हफ्ते में होने वाली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में मौजूदा 8.25% ब्याज दर को घटाकर 8% से 8.20% के दायरे में लाने पर चर्चा हो सकती है। बताया जा रहा है कि EPFO के कॉर्पस पर दबाव बढ़ रहा है और इसी वजह से ब्याज दरों में कटौती का विकल्प सामने रखा जा सकता है।

कैसे तय होती है EPF की ब्याज दर?

EPF पर मिलने वाली ब्याज दर सीधे EPFO के निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती है। फरवरी के आखिरी हफ्ते में EPFO की फाइनेंस, इनवेस्टमेंट और ऑडिट कमेटी की बैठक होगी, जिसमें रिटर्न की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद सिफारिश CBT को भेजी जाएगी। अगर CBT इसे मंजूरी देता है, तो अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय की सहमति के बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा नोटिफाई किया जाएगा। आमतौर पर ब्याज की रकम साल के मध्य में कर्मचारियों के खातों में डाली जाती है।

क्या चुनाव रोक सकते हैं कटौती?

हालांकि सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुड्डुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार लगातार तीसरे साल ब्याज दरों को स्थिर भी रख सकती है। ऐसे में फिलहाल अंतिम फैसला पूरी तरह बैठक के नतीजों पर निर्भर करेगा।

वेज सीलिंग बढ़ेगी या नहीं?

इस बैठक में वेज सीलिंग यानी सैलरी लिमिट बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। मौजूदा समय में EPF के लिए बेसिक सैलरी की सीमा 15,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने पर विचार हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में EPFO को इस लिमिट की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। वेज सीलिंग बढ़ने से ज्यादा कर्मचारियों पर अनिवार्य PF कटौती लागू हो सकती है, जिससे कंपनियों की लागत भी बढ़ेगी।

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