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फेस्टिवल सीजन 2 लाख नौकरियां पैदा करेगा, इन शहरों में होंगी जोरदार भर्तियां, आई ये लेटेस्ट रिपोर्ट

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman Published : Sep 26, 2025 06:52 am IST, Updated : Sep 26, 2025 06:52 am IST

त्योहारों का मौसम अब केवल बिक्री और छूट तक सीमित नहीं रहा। भारत की गिग इकॉनमी, महिला भागीदारी, और टियर-2 शहरों की आर्थिक भागीदारी को देखते हुए यह स्पष्ट है कि फेस्टिव हायरिंग अब एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि एक स्थायी ट्रेंड बनता जा रहा है।

त्योहारों के इस सीजन में महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है। - India TV Paisa
Photo:CANVA त्योहारों के इस सीजन में महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है।

भारत में इस साल का त्योहारी सीजन न केवल उपभोक्ताओं के लिए खास रहेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसरों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। ग्लोबल टेक्नोलॉजी और डिजिटल टैलेंट सॉल्यूशंस प्रदाता एनएलबी सर्विसेज या NLB Services के मुताबिक, त्योहारी सीजन 2025 के दौरान देशभर में लगभग 2 लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, कंपनी के सीईओ सचिन आलूग का कहना है कि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 20-25 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि का प्रमुख कारण क्विक कॉमर्स और थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स सेक्टरों में तेज़ी से हो रहा निवेश है, खासकर सप्लाई चेन और लास्ट-माइल डिलीवरी नेटवर्क के विस्तार में।

गिग वर्कफोर्स का बोलबाला, लेकिन स्थायित्व के साथ

आलूग ने बताया कि इस वर्ष होने वाली कुल भर्तियों में से 70 प्रतिशत नौकरियां गिग या अस्थायी होंगी, जबकि 30 प्रतिशत पद स्थायी होंगे। यह दर्शाता है कि कंपनियां अब ब्लेंडेड वर्कफोर्स मॉडल अपना रही हैं, जिसमें लचीलापन और दक्षता का संतुलन बना रहे। महत्वपूर्ण बात यह है कि ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियां त्योहारी सीजन के बाद भी करीब 26% कर्मचारियों को बनाए रखने की योजना बना रही हैं। यह इस बात का संकेत है कि त्योहारी भर्ती अब केवल मौसमी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ढांचागत बदलाव का हिस्सा बन रही है। पहले जहां 70-75% गिग वर्कर्स को सीजन के बाद हटा दिया जाता था, वहीं अब मांग स्थिर होती दिखाई दे रही है।

टियर-2 और 3 शहर बन रहे रोजगार के नए केंद्र

इस बार भुवनेश्वर, कोच्चि, इंदौर, सूरत और नागपुर जैसे शहरों में गिग वर्कफोर्स की मांग में 30-40 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। ये शहर अब माइक्रो-फुलफिलमेंट हब्स के रूप में उभर रहे हैं और तेजी से रिटेल और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक्स सपोर्ट का केंद्र बनते जा रहे हैं। एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में FY26 में टियर-2 शहरों का गिग हायरिंग में योगदान 47% से बढ़कर 50% तक पहुंच सकता है।

महिलाओं की भागीदारी में बढ़ोतरी

त्योहारों के इस सीजन में महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है। कंपनी का अनुमान है कि महिला कर्मचारियों द्वारा गिग या शॉर्ट-टर्म जॉब्स में भागीदारी में 30-35 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है, खासकर कस्टमर एक्सपीरियंस, ग्रूमिंग, डिलीवरी और फूड सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में। एनएलबी सर्विसेज के अनुसार, अब 35% से अधिक कंपनियां त्योहारी भर्ती को अपनी दीर्घकालिक टैलेंट रणनीति का हिस्सा मान रही हैं। कंपनियां प्री-फेस्टिव स्किलिंग प्रोग्राम्स, वर्कफोर्स डाइवर्सिटी गोल्स और एजाइल वर्कफोर्स मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, ताकि त्योहारी सीजन को एक रीयल-टाइम टैलेंट टेस्टिंग ग्राउंड की तरह इस्तेमाल किया जा सके।

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