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नौकरी से निकाले जाने पर मिलेगी 15 दिन की एक्स्ट्रा सैलरी, 45 दिन में अकाउंट में आएगी पूरी रकम; विस्तार से जानें सरकार का नया नियम

Edited By: Shivendra Singh Published : Nov 28, 2025 08:50 am IST, Updated : Nov 28, 2025 09:15 am IST

कई बार नौकरी छूटने की स्थिति में कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझ जाते हैं। नई नौकरी मिलने तक घर खर्च, EMI, बच्चों की फीस जैसी जिम्मेदारियां भारी पड़ने लगती हैं। लेकिन 21 नवंबर 2025 से लागू हुए नए श्रम संहिता ने इस चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है।

नौकरी से निकाले जाने...- India TV Paisa
Photo:CANVA नौकरी से निकाले जाने पर मिलेगा 15 दिन की मजदूरी का अलग फंड

देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है केंद्र सरकार का नया श्रम नियम। अक्सर देखा जाता है कि नौकरी छूटने के बाद कर्मचारी आर्थिक अनिश्चितता, मानसिक दबाव और भविष्य की चिंता से घिर जाता है। कई बार कंपनियों की देरी और मनमानी के कारण फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में महीनों लग जाते हैं। लेकिन अब यह स्थिति बदलने वाली है। सरकार ने 21 नवंबर 2025 से लागू नई श्रम संहिता में कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे नौकरी खोने के बाद भी कमाई का भरोसा बना रहेगा।

नई व्यवस्था क्या कहती है?

नए श्रम कोड के तहत, नौकरी से हटाए गए कर्मचारी दो तरह की राशि अनिवार्य और 15 दिनों की मजदूरी के बराबर ‘पुनः कौशल निधि’ मुआवजा के हकदार होंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि नौकरी समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर यह पूरी राशि सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी। यह प्रावधान औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को नए कौशल सीखकर दोबारा रोजगार पाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

रिट्रेंचमेंट क्या होता है?

नए नियमों में रिट्रेंचमेंट की परिभाषा को और स्पष्ट किया गया है। रिट्रेंचमेंट का मतलब होता है:

  • बिना किसी गलती या अनुशासनहीनता के
  • कंपनी की आवश्यकता कम होने, प्रोजेक्ट खत्म होने या पद समाप्त होने पर
  • कर्मचारी को नौकरी से हटाना

यह नियम उन स्थितियों पर लागू नहीं होता जब कर्मचारी स्वयं इस्तीफा देता है या रिटायरमेंट लेता है।

कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?

  • अचानक नौकरी जाते ही पैसों की किल्लत नहीं होगी। एक्स्ट्रा 15 दिन की सैलरी और मुआवजा कर्मचारी को शुरुआती महीनों की आर्थिक चुनौतियों से बचाएगा।
  • नई नौकरी खोजने में सहूलियत मिलेगी। पुनः कौशल निधि से कर्मचारी नए कौशल सीखकर रोजगार बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकते हैं।
  • कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी। अब कंपनियां मनचाहा टाइम लेकर फुल एंड फाइनल रोक नहीं पाएंगी। 45 दिनों की समयसीमा अनिवार्य है।
  • प्रक्रिया पारदर्शी और तेज होगी। नियमों के स्पष्ट होने से कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए प्रक्रिया आसान और पारदर्शी हो जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

भारत में लगातार बदलते रोजगार पैटर्न, तकनीकी बदलाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच, नौकरी की अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का यह कदम कर्मचारियों को सुरक्षा कवच देने जैसा है। अब नौकरी जाने का मतलब आर्थिक संकट नहीं, बल्कि नई स्किल सीखकर नई शुरुआत का अवसर होगा।

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