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“RERA को खत्म कर देना बेहतर” सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी! बिल्डरों पर उठे बड़े सवाल

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 12, 2026 01:34 pm IST,  Updated : Feb 12, 2026 01:34 pm IST

देश में घर खरीदने का सपना देखने वाले लाखों लोगों के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) को एक मजबूत सुरक्षा कवच माना गया था। लेकिन अब उसी संस्था की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल मचा दी है।

RERA पर सुप्रीम कोर्ट का...- India TV Hindi
RERA पर सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा Image Source : ANI/CANVA

रियल एस्टेट सेक्टर को कंट्रोल करने के लिए बनाए गए कानून RERA पर अब देश की सर्वोच्च अदालत ने ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर यह संस्था अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है और घर खरीदारों की बजाय डिफॉल्टर बिल्डरों को राहत दे रही है, तो इसे समाप्त कर देने पर भी विचार किया जाना चाहिए। अदालत की इस टिप्पणी ने रियल एस्टेट जगत में हलचल मचा दी है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ हिमाचल प्रदेश सरकार बनाम नरेश शर्मा मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान CJI ने कहा कि राज्यों को आत्ममंथन करना चाहिए कि RERA आखिर किसके लिए बनाई गई थी। अदालत ने चिंता जताई कि कई मामलों में आम खरीदारों को राहत मिलने की बजाय लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है, जबकि डिफॉल्टर बिल्डरों को फायदा मिल जाता है। CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई संस्था अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रही, तो उसके अस्तित्व पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या है पूरा मामला?

मामला हिमाचल प्रदेश में RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला ट्रांसफर करने से जुड़ा है। राज्य सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट का मानना था कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के यह कदम संस्था के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को कार्यालय ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी। साथ ही यह निर्देश भी दिया कि RERA और उसकी अपीलीय ट्रिब्यूनल दोनों का कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए और लंबित मामलों की सुनवाई नियमित रूप से जारी रहे।

खरीदारों की परेशानी पर चिंता

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि RERA का उद्देश्य घर खरीदारों को समय पर न्याय और पारदर्शिता प्रदान करना था। लेकिन जमीनी स्तर पर कई खरीदारों की शिकायत है कि उन्हें वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है और ठोस राहत नहीं मिलती।

RERA का मूल मकसद

RERA कानून 2016 में लागू किया गया था ताकि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाई जा सके और बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगे। हर राज्य में नियामक प्राधिकरण बनाकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई थी कि फ्लैट खरीदारों को समय पर घर और न्याय मिले।

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