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बैंकों की मनमानी पर RBI का कड़ा एक्शन! गलत स्कीम बेची तो लौटाना पड़ेगा पूरा पैसा

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 12, 2026 12:34 pm IST,  Updated : Feb 12, 2026 12:34 pm IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की मिस-सेलिंग यानी गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाने का प्रस्ताव रखा है। नए नियमों के तहत अगर यह साबित हो जाता है कि ग्राहक को गलत तरीके से कोई स्कीम बेची गई, तो बैंक को पूरी रकम वापस करनी होगी।

ग्राहकों को गुमराह...- India TV Hindi
ग्राहकों को गुमराह किया तो नहीं बख्शे जाएंगे बैंक! Image Source : ANI

अगर आपको भी कभी बैंक से बिना जरूरत बीमा पॉलिसी, निवेश योजना या कोई और प्रोडक्ट खरीदने के लिए बार-बार फोन आया हो, तो यह खबर आपके लिए राहत लेकर आई है। ग्राहकों को मिस-सेलिंग यानी गलत या जबरन उत्पाद बेचने की बढ़ती शिकायतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सख्त कदम उठाने का संकेत दिया है। केंद्रीय बैंक ने साफ कर दिया है कि अगर किसी ग्राहक को गलत तरीके से स्कीम बेची गई, तो बैंक को पूरा पैसा लौटाना होगा और नुकसान की भरपाई भी करनी पड़ेगी।

मिस-सेलिंग पर लगेगा ब्रेक

आरबीआई द्वारा जारी मसौदा नियमों में कहा गया है कि बैंकों की नीतियां ऐसी नहीं होनी चाहिएं जो कर्मचारियों या डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (DSA) को गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने के लिए प्रेरित करें। खासकर थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स जैसे बीमा, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश योजनाएं की बिक्री में किसी भी तरह के सीधे या परोक्ष इंसेंटिव पर रोक लगाने की बात कही गई है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इंसेंटिव आधारित टारगेट सिस्टम कई बार ग्राहकों के हितों के खिलाफ काम करता है और इसी से मिस-सेलिंग को बढ़ावा मिलता है।

जबरन कॉल और सीमित समय

मसौदे में यह भी प्रस्तावित है कि बैंक ग्राहकों को उनकी अनुमति के बिना फोन कॉल नहीं कर सकेंगे। अगर कॉल की जाती है, तो वह केवल ऑफिस टाइम के दौरान ही होनी चाहिए। इसका मकसद ग्राहकों को अनचाहे मार्केटिंग कॉल से राहत देना है।

गलत बिक्री साबित हुई तो पूरा रिफंड

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर यह साबित हो जाए कि बैंक ने किसी ग्राहक को गलत जानकारी देकर या दबाव डालकर कोई प्रोडक्ट बेच दिया है, तो बैंक को ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा। इतना ही नहीं, अगर ग्राहक को इससे कोई आर्थिक नुकसान हुआ है, तो उसकी भरपाई भी बैंक को ही करनी पड़ेगी। आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि बैंक अपने किसी प्रोडक्ट के साथ जबरन कोई दूसरी कंपनी का प्रोडक्ट नहीं जोड़ सकते। ग्राहक को पूरा हक होगा कि वह अलग-अलग विकल्पों में से अपनी पसंद का प्रोडक्ट खुद चुने।

डार्क पैटर्न पर भी सख्ती

आरबीआई ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। यानी ऐसे यूजर इंटरफेस या डिजाइन, जो ग्राहक को भ्रमित कर निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं, उन्हें प्रतिबंधित किया जाएगा।

4 मार्च तक मांगी गई राय

रिजर्व बैंक ने मसौदा नियमों पर आम जनता और संबंधित पक्षों से 4 मार्च तक सुझाव मांगे हैं। माना जा रहा है कि इन सख्त नियमों से बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों के अधिकारों को मजबूत सुरक्षा मिलेगी।

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