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राजकोषीय स्थिति सूचकांक : ओडिशा, छत्तीसगढ़ और गोवा की आर्थिक सेहत सबसे सही, पंजाब-केरल की हालत खराब

Written By: Pawan Jayaswal Published : Jan 25, 2025 09:13 am IST, Updated : Jan 25, 2025 09:15 am IST

नीति आयोग द्वारा जारी राजकोषीय सेहत सूचकांक के अनुसार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गोवा और झारखंड की आर्थिक सेहत सबसे सही है। वहीं, पंजाब, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल सबसे नीचे हैं।

नीति आयोग- India TV Paisa
Photo:FILE नीति आयोग

खनिज संसाधनों से भरपूर ओडिशा, छत्तीसगढ़, गोवा और झारखंड नीति आयोग के पहली राजकोषीय सेहत सूचकांक रिपोर्ट में शामिल राज्यों में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले 'अचीवर' बनकर उभरे हैं। 'राजकोषीय सेहत सूचकांक 2025' शीर्षक रिपोर्ट में 18 प्रमुख राज्यों को शामिल किया गया है। ये राज्य भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), जनसांख्यिकी, कुल सार्वजनिक व्यय, राजस्व एवं समग्र राजकोषीय स्थिरता में अपने योगदान के लिहाज से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर संचालित करते हैं। रिपोर्ट कहती है कि पंजाब, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल राजकोषीय सेहत सूचकांक (एफएचआई) में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य रहे हैं।

ओडिशा टॉप पर 

राज्यों की राजकोषीय स्थिति के बारे में समझ विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की गई इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, कर्नाटक को 'अगली कतार' वाली श्रेणी में रखा गया है। इस रिपोर्ट को 16वें वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया ने जारी किया। रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा 67.8 के उच्चतम समग्र अंक के साथ राजकोषीय सेहत के मामले में उत्कृष्ट स्थिति में है। यह व्यय की गुणवत्ता और राजस्व जुटाने के तहत औसत से बेहतर प्रदर्शन के साथ ऋण सूचकांक (99.0) और ऋण स्थिरता (64.0) रैंकिंग में शीर्ष पर है।

पंजाब, पश्चिम बंगाल और केरल  की स्थिति ठीक नहीं

ओडिशा के साथ गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ ने भी 2014-15 से 2021-22 की अवधि में उच्चतम औसत एफएचआई अंक हासिल किया। इसके उलट केरल और पंजाब व्यय की कम गुणवत्ता और ऋण स्थिरता से जूझ रहे हैं। पश्चिम बंगाल भी राजस्व जुटाने और ऋण सूचकांक के मुद्दों का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में राजकोषीय घाटा अधिक है, जबकि हरियाणा की ऋण स्थिति खराब है। राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक की गणना में इस्तेमाल किए जाने वाले आंकड़े नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) से जुटाए जाते हैं।

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