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थम नहीं रही रुपये में गिरावट, देश का आयात बिल बढ़ने का खतरा, क्या बढ़ेगा निर्यात?

 Edited By: Pawan Jayaswal
 Published : Jan 17, 2025 02:39 pm IST,  Updated : Jan 17, 2025 02:39 pm IST

घरेलू मुद्रा में गिरावट से भारत के सोने के आयात ‘बिल’ में वृद्धि होगी। पिछले 10 वर्षों के निर्यात आंकड़ों से पता चलता है कि कमजोर रुपये से निर्यात को कोई मदद नहीं मिलती है, जबकि अर्थशास्त्रियों की राय इससे उलट है।

भारत का आयात- India TV Hindi
भारत का आयात Image Source : FILE

रुपये की विनिमय दर में गिरावट से कच्चे तेल, कोयला, वनस्पति तेल, सोना, हीरे, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, प्लास्टिक और रसायनों के लिए अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। इससे देश का आयात ‘बिल’ बढ़ जाएगा। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने शुक्रवार को कहा कि घरेलू मुद्रा में गिरावट से भारत के सोने के आयात ‘बिल’ में वृद्धि होगी। खासकर जब वैश्विक सोने की कीमतें सालाना आधार पर 31.25 प्रतिशत बढ़कर जनवरी 2025 में 86,464 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गई हैं। जनवरी 2024 में कीमत 65,877 डॉलर प्रति किलोग्राम थी।

डॉलर के मुकाबले 4.71% कमजोर हुआ रुपया

‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारतीय रुपया (INR) पिछले वर्ष 16 जनवरी से अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.71 प्रतिशत कमजोर होकर 82.8 रुपये से 86.7 रुपये पर आ गया है। वहीं, पिछले 10 वर्षों में यानी जनवरी 2015 से 2025 के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 41.3 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 41.2 रुपये से टूटकर 86.7 रुपये पर आ गया है। इसकी तुलना में, चीनी युआन में 3.24 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 7.10 युआन से घटकर 7.33 युआन हो गया।

कमजोर रुपये से बढ़ेगा आयात बिल

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर कमजोर रुपये से आयात ‘बिल’ बढ़ेगा, ऊर्जा तथा कच्चे माल की कीमतें बढ़ेंगी जिससे अर्थव्यवस्था में दबाव बढ़ेगा। पिछले 10 वर्षों के निर्यात आंकड़ों से पता चलता है कि कमजोर रुपये से निर्यात को कोई मदद नहीं मिलती है, जबकि अर्थशास्त्रियों की राय इससे उलट है।’’ उन्होंने कहा कि हालांकि आम राय के अनुसार कमजोर मुद्रा से निर्यात को बढ़ावा मिलना चाहिए, लेकिन भारत के दशक भर के आंकड़े एक अलग कहानी बयां करते हैं। उच्च आयात वाले क्षेत्र फल-फूल रहे हैं, जबकि कपड़ा जैसे श्रम-गहन, कम आयात वाले उद्योग लड़खड़ा रहे हैं।

कुल वस्तु निर्यात में 39 प्रतिशत की वृद्धि

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘2014 से 2024 तक के व्यापार आंकड़े भी अलग कहानी दर्शाते हैं। 2014 से 2024 की अवधि में कुल वस्तु निर्यात में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कंप्यूटर जैसे उच्च आयात वाले क्षेत्रों में बहुत अधिक वृद्धि देखी गई।’’ उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 232.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और मशीनरी तथा कंप्यूटर निर्यात में 152.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। श्रीवास्तव ने कहा कि इस बीच, परिधान जैसे कम आयात वाले क्षेत्रों में कमजोरी आई, जबकि कमजोर रुपये के कारण उनके सामान वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी हो गए होंगे।

कमजोर रुपया हमेशा निर्यात को बढ़ावा नहीं देता 

उन्होंने कहा, ‘‘इन प्रवृत्तियों से पता चलता है कि कमजोर रुपया हमेशा निर्यात को बढ़ावा नहीं देता है। यह श्रम-गहन निर्यात को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है और कम मूल्य संवर्धन के साथ आयात-संचालित निर्यात को बढ़ावा देता है।’’ जीटीआरआई ने सुझाव दिया कि भारत को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए वृद्धि विकास और मुद्रास्फीति नियंत्रण के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाना होगा तथा साथ ही रुपया प्रबंधन व व्यापारिक रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, वास्तविक स्थिति गंभीर है। भारत के 600 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा भंडार के अधिकतर हिस्से का ऋण/निवेश है, जिसका ब्याज सहित भुगतान किया जाना है, जिससे रुपये को स्थिर करने में उनकी भूमिका सीमित हो जाती है।’’

(भाषा/पीटीआई के इनपुट के साथ)

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