आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज रफ्तार दुनिया अब टेक सेक्टर के कर्मचारियों के लिए संकट का संकेत बन गई है। जहां एक ओर कंपनियां अरबों डॉलर AI प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर उसी टेक्नोलॉजी के नाम पर हजारों लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं। मेटा, अमेजन, गूगल, टीसीएस और एक्सेंचर जैसी दिग्गज कंपनियों ने हाल के महीनों में AI से जुड़ी हजारों नौकरियां काट दी हैं, जिससे आईटी सेक्टर में चिंता का माहौल है।
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Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग, जो इस साल OpenAI, Apple और Google से टॉप टैलेंट्स को अपनी कंपनी में ला रहे थे, अब उन्हीं कर्मचारियों को निकालने पर मजबूर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा के चीफ AI ऑफिसर एलेक्जेंडर वैंग ने कंपनी के सुपरइंटेलिजेंस लैब्स (MSL) से करीब 600 लोगों की छंटनी की घोषणा की है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि निकाले गए कर्मचारियों को मेटा के अन्य डिपार्टमेंट्स में आवेदन करने का मौका दिया जाएगा। अगस्त में ही वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया था कि मेटा ने अपने AI डिवीजन में भर्ती पर रोक लगा दी है।
गूगल, अमेजन और टीसीएस भी कर रहे हैं कटौती
Meta अकेली कंपनी नहीं है जो AI जॉब्स घटा रही है। गूगल ने सितंबर में 200 से ज्यादा को AI प्रोजेक्ट्स जैसे Gemini और AI Overviews से निकाल दिया। अक्टूबर में कंपनी ने अपने डिजाइन डिपार्टमेंट से 100 कर्मचारियों को भी हटाया। अमेजन ने अपने कर्मचारियों के करीब 15% को निकालने की प्लानिंग बनाई है। CEO एंडी जस्सी ने कहा कि कंपनी अब पूरी तरह AI-ड्रिवन भविष्य की ओर बढ़ रही है और जो इसके साथ नहीं चल पाएंगे, वे पीछे रह जाएंगे। TCS ने भी 6000 कर्मचारियों को बाहर किया है और अगले कुछ महीनों में इतने ही और लोगों को निकालने की योजना बना रही है। हालांकि, कंपनी ब्रिटेन में AI-आधारित नए प्रोजेक्ट्स के लिए 5000 नई नौकरियां भी देने की तैयारी में है।
AI के नाम पर बढ़ रही अस्थिरता
टेक कंपनियों का दावा है कि वे AI को अपनाने के लिए रिस्ट्रक्चरिंग कर रही हैं, लेकिन इसका असर सीधे कर्मचारियों पर पड़ रहा है। एक्सेंचर ने भी इसी कारण 11 हजार लोगों की छंटनी का ऐलान किया है।