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बीमा कंपनियों की मनमानी होगी खत्म! अब 15, 30 या 60 दिनों में करना होगा क्लेम का पूरा निपटारा; IRDAI का सख्त आदेश

 Written By: Shivendra Singh
 Published : May 28, 2026 10:19 am IST,  Updated : May 28, 2026 10:33 am IST

बीमा पॉलिसी लेने के बाद सबसे बड़ी चिंता क्लेम मिलने को लेकर होती है। कई बार ग्राहकों को महीनों तक बीमा कंपनियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लेकिन अब ऐसा करना कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा।

IRDAI के नए नियम से अब तय...- India TV Hindi
IRDAI के नए नियम से अब तय समय में मिलेगा क्लेम का पैसा

बीमा पॉलिसी लेने के बाद क्लेम के लिए महीनों तक चक्कर लगाने वाले ग्राहकों के लिए अब बड़ी राहत की खबर है। बीमा कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए IRDAI ने सख्त कदम उठाए हैं। नए नियमों के तहत अब कंपनियों को तय समय सीमा के भीतर क्लेम का निपटारा करना होगा। इतना ही नहीं, देरी होने पर कंपनियों के बड़े अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। इससे करोड़ों पॉलिसीधारकों को तेज और पारदर्शी सेवा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

IRDAI के नए निर्देशों के मुताबिक अब बीमा कंपनियों को हर 15, 30 और 60 दिन के भीतर क्लेम से जुड़ी पूरी जानकारी ग्राहकों को देनी होगी। कंपनियों को बताना पड़ेगा कि कितने क्लेम मंजूर हुए, कितने खारिज किए गए और कितने मामलों में भुगतान लंबित है। इसका मकसद ग्राहकों को बार-बार ऑफिस के चक्कर लगाने से बचाना है।

पता और नॉमिनी बदलने में नहीं होगी देरी

अब अगर कोई ग्राहक अपनी बीमा पॉलिसी में पता, मोबाइल नंबर या नॉमिनी बदलवाना चाहता है, तो कंपनी को यह काम 7 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। अगर तय समय में काम नहीं हुआ तो इसे शिकायत माना जाएगा और कंपनी की जवाबदेही तय होगी।

CEO और MD की बढ़ेगी जिम्मेदारी

IRDAI ने पहली बार बीमा कंपनियों के MD और CEO की जिम्मेदारी सीधे ग्राहक सेवा से जोड़ दी है। नए नियमों के तहत अधिकारियों का बोनस और अतिरिक्त वेतन इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी कितनी तेजी और पारदर्शिता से क्लेम का निपटारा कर रही है। अगर कंपनी ग्राहकों को सही जानकारी नहीं देती या वेबसाइट पर जरूरी डेटा अपलोड नहीं करती, तो अधिकारियों का बोनस रोका जा सकता है।

कंपनियों के लिए तय किए गए 6 बड़े मानदंड

IRDAI ने बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली को परखने के लिए छह बड़े मापदंड तय किए हैं। इसमें कंपनी की आर्थिक स्थिति, पॉलिसी की पूरी जानकारी, क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड, शिकायत निपटान, लेखा मानकों का पालन और ग्राहकों को गुमराह करने वाले तरीकों पर नजर रखी जाएगी।

ग्राहकों को क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम लागू होने के बाद क्लेम प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और तेज होगी। ग्राहकों को समय पर पैसा मिलने की संभावना बढ़ेगी और बीमा कंपनियों पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव रहेगा। खास बात यह है कि अब कंपनियां ग्राहकों को लंबे समय तक परेशान नहीं कर पाएंगी।

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