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तेल बाजार में हलचल तेज! OPEC ने बढ़ाया प्रोडक्शन, UAE के फैसले पर सस्पेंस बरकरार

 Written By: Shivendra Singh
 Published : May 03, 2026 10:28 pm IST,  Updated : May 03, 2026 10:28 pm IST

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में हलचल और तेज हो गई है। तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC ने जून महीने के लिए अपने उत्पादन को बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन इसी बीच UAE के अचानक बाहर होने पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है।

वेस्ट एशिया संकट के...- India TV Hindi
वेस्ट एशिया संकट के बीच OPEC ने बढ़ाई सप्लाई Image Source : CANVA

वैश्विक तेल बाजार इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल से गुजर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई में बाधा के बीच तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC ने बड़ा फैसला लिया है। सात सदस्य देशों ने जून महीने के लिए तेल उत्पादन को बढ़ाने का ऐलान किया है, लेकिन इसी बीच UAE के संगठन से बाहर होने की खबर ने बाजार में नई चिंता पैदा कर दी है।

OPEC के प्रमुख सदस्य देशों (सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, ओमान और अल्जीरिया) ने मिलकर जून के लिए 1.88 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। इस कदम का मकसद वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई को स्थिर रखना है, क्योंकि हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

UAE के बाहर होने पर चुप्पी, बढ़ा सस्पेंस

हालांकि इस बैठक में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि UAE के OPEC से बाहर होने पर कोई आधिकारिक चर्चा नहीं की गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह चुप्पी संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों की ओर इशारा करती है। UAE का बाहर होना OPEC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह प्रमुख तेल उत्पादकों में से एक है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ी चुनौती

तेल सप्लाई पर सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी टकराव का पड़ा है। ईरान द्वारा लगाए गए अवरोध के कारण तेल और गैस की सप्लाई लगभग ठप हो गई है। ऐसे में OPEC का उत्पादन बढ़ाने का फैसला कागजों पर तो बड़ा लगता है, लेकिन जमीन पर इसका असर सीमित रह सकता है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि OPEC का यह कदम असल में बाजार को संदेश देने के लिए है कि संगठन अब भी नियंत्रण में है। हालांकि, वास्तविक सप्लाई में बढ़ोतरी तब तक मुश्किल है जब तक जियोपॉलिटिकल तनाव कम नहीं होता। पश्चिम एशिया में युद्ध और सप्लाई बाधाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा, खासकर भारत जैसे आयातक देशों पर, जहां महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

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