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बढ़ती महंगाई से विकास की रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका, मूडीज के बाद फिच ने घटाया ग्रोथ रेट

फिच ने कहा, भारत के लिए वित्त वर्ष 2022-23 में अपने वृद्धि दर के अनुमान को 1.8 प्रतिशत घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया है।

India TV Paisa Desk Edited by: India TV Paisa Desk
Published on: March 22, 2022 18:42 IST
fitch- India TV Hindi
Photo:FILE

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Highlights

  • अगले वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया
  • चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी) की वृद्धि के अनुमान को बढ़ाकर 8.7 प्रतिशत कर दिया
  • रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और बढ़ती महंगाई के कारण अनुमान को घटाया

नई दिल्ली। रेटिंग एजेंसी ‘फिच’ ने रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और बढ़ती महंगाई के कारण अगले वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि दर के अनुमान को 10.3 प्रतिशत से घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के अनुमान को 0.6 प्रतिशत बढ़ाकर 8.7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले मूडीज ने भी ग्रोट रेट का अनुमान 9.5 प्रतिशत  से घटाकर 9.1 प्रतिशत कर दिया था। 

ईंधन की बढ़ी कीमतों का असर से बढ़ाई चिंता 

फिच ने कहा, हालांकि, तेजी से बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण हमने भारत के लिए वित्त वर्ष 2022-23 में अपने वृद्धि दर के अनुमान को 1.8 प्रतिशत घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था के सात प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। फिच ने अपने ‘वैश्विक आर्थिक परिदृश्य- मार्च-2022’ में कहा है कि कोविड-19 महामारी के बाद पुनरुद्धार वैश्विक आपूर्ति के बड़े झटके से प्रभावित हुआ है जिससे वृद्धि घटेगी और मुद्रास्फीति बढ़ेगी। रेटिंग एजेंसी ने कहा, यूक्रेन में चल रहे युद्ध और रूस पर आर्थिक पाबंदियों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर संकट खड़ा कर दिया है। पिछले हफ्ते एक और वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए भारत के वृद्धि दर के अनुमान को 9.5 प्रतिशत से घटाकर 9.1 फीसदी कर दिया था। 

वैश्विक अर्थव्यवस्था के वृद्धि अनुमान को भी घटाया 

फिच ने कहा कि उसने वैश्विक अर्थव्यवस्था के वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया है। मूडीज ने भी कहा था कि यूक्रेन पर रूसी हमले ने वैश्विक इकॉनमी को तीन तरीके से प्रभावित किया है। कमोडिटी के भाव में उछाल, वित्तीय व कारोबारी दिक्कतों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को रिस्क और वैश्विक स्तर पर राजनीतिक तनाव से सेंटिमेंट प्रभावित हुआ है। 

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