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नीचे से गुजरेंगी ट्रेनें और ऊपर से फर्राटा भरेगी बुलेट ट्रेन, वडोदरा में पूरा हुआ बड़ा काम

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Oct 12, 2026 02:57 pm IST,  Updated : Oct 12, 2026 03:06 pm IST

देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में गुजरात के वडोदरा में एक बड़ी निर्माण उपलब्धि हासिल हुई है। इससे बुलेट ट्रेन के रास्ते में आने वाली एक बड़ी तकनीकी चुनौती को पार करने में मदद मिली है।

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नीचे चलेंगी नॉर्मल ट्रेनें और ऊपर बुलेट ट्रेन Image Source : MINISTRY OF RAILWAYS

देश की पहली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इस प्रोजेक्ट में गुजरात के वडोदरा में एक बड़ी निर्माण उपलब्धि हासिल हुई है। यहां दिल्ली-मुंबई राजधानी एक्सप्रेस के व्यस्त रेल रूट के ऊपर सभी 14 पोर्टल बीम लगाने का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह काम इसलिए खास है, क्योंकि नीचे मौजूदा रेलवे ट्रैक पर ट्रेनें चलती रहेंगी, जबकि इनके ऊपर से बुलेट ट्रेन का एलिवेटेड कॉरिडोर गुजरेगा। इस उपलब्धि से बुलेट ट्रेन के रास्ते में आने वाली एक बड़ी तकनीकी चुनौती को पार करने में मदद मिली है।

बता दें कि वडोदरा में बुलेट ट्रेन का करीब 8.3 किलोमीटर लंबा हिस्सा घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र और रेलवे नेटवर्क के बीच से गुजरता है। इस मार्ग पर भारतीय रेलवे की पांच लाइनें आती हैं, जिनमें दो मुख्य लाइनें शामिल हैं। इसके अलावा बुलेट ट्रेन का ट्रैक दिल्ली-मुंबई राजधानी रूट को तिरछे कोण पर पार करता है। इस व्यस्त रेल मार्ग पर निर्माण करना आसान नहीं था। मौजूदा ट्रेनों की आवाजाही को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखते हुए बुलेट ट्रेन के लिए जरूरी ढांचा तैयार करना था। ऐसे में विशेष डिजाइन वाले पोर्टल बीम लगाए गए हैं, जो आगे बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर को सहारा देंगे।

14 पोर्टल बीम का क्या है काम?

दिल्ली-मुंबई रूट के ऊपर कुल 14 पोर्टल बीम बनाए गए हैं। इनमें से 10 बीम वडोदरा बुलेट ट्रेन स्टेशन और विश्वामित्री रेलवे स्टेशन के बीच सूरत की ओर स्थित हैं। वहीं, चार बीम वडोदरा रेलवे स्टेशन और छायापुरी रेलवे स्टेशन के बीच अहमदाबाद की ओर बनाए गए हैं। इन बीम के ऊपर करीब 40 मीटर लंबे कंपोजिट गर्डर लगाए जाएंगे। इसके बाद बुलेट ट्रेन के एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण को आगे बढ़ाया जा सकेगा। बाकी स्थानों पर स्पैन-बाय-स्पैन तकनीक से निर्माण किया जाएगा।

1,500 टन का है एक बीम

इन पोर्टल बीम को बनाना इंजीनियरों के लिए बड़ी चुनौती रहा। प्रत्येक बीम का वजन तैयार होने के बाद करीब 1,500 टन है। इनकी लंबाई लगभग 37 मीटर, ऊंचाई चार मीटर और चौड़ाई भी चार मीटर है। हर बीम को तैयार करने में करीब 590 घन मीटर कंक्रीट का इस्तेमाल हुआ, जबकि उसके लोहे के ढांचे का वजन लगभग 55 टन है। सीमित जगह और चालू रेलवे ट्रैक के कारण इन्हें मौके पर ही कंक्रीट डालकर बनाया गया। इस काम में भारी क्षमता वाली क्रेन, हाइड्रोलिक जैक और विशेष उपकरणों की मदद ली गई।

बुलेट ट्रेन परियोजना को मिलेगी गति

सभी 14 पोर्टल बीम का काम पूरा होना परियोजना के लिए अहम कदम है। अब इनके ऊपर गर्डर लगाने और एलिवेटेड कॉरिडोर को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, यह उपलब्धि निर्माण कार्य का एक चरण है, पूरी बुलेट ट्रेन परियोजना के पूरा होने का संकेत नहीं।

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