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‘चीन वाली गलती भारत के साथ नहीं दोहराएंगे’-ट्रेड डील पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा बयान

 Published : Mar 06, 2026 02:48 pm IST,  Updated : Mar 06, 2026 02:48 pm IST

लैंडाउ ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसी साल डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की थी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत करते अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ।- India TV Hindi
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत करते अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ। Image Source : IMAGE FROM X POSTED BY @DRSJAISHANKAR

अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ ने गुरुवार को रायसीना डायलॉग 2026 में स्पष्ट संदेश दिया कि भारत के साथ चल रही व्यापार समझौते की बातचीत में वाशिंगटन अपने राष्ट्रीय हितों और अमेरिकी नागरिकों के लाभ को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। नई दिल्ली में आयोजित इस प्रमुख भू-राजनीतिक सम्मेलन में बोलते हुए लैंडाउ ने कहा कि भारत को समझना चाहिए कि हम 20 साल पहले चीन के साथ की गई गलतियों को दोहराने वाले नहीं हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जो भी समझौता हो, वह हमारे लोगों के लिए भी न्यायसंगत और संतुलित हो। आखिरकार, हमें अपने नागरिकों के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है- जैसे भारत सरकार अपने नागरिकों के प्रति जवाबदेह है।

'अमेरिका फर्स्ट' का मतलब अलग-थलग नहीं, बल्कि संतुलित साझेदारी

लैंडाउ ने जोर देकर कहा कि अमेरिका फर्स्ट नीति का अर्थ दुनिया से अलगाव नहीं है। बल्कि, यह अन्य देशों-खासकर भारत जैसे महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ विन-विन सहयोग पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अमेरिका फर्स्ट का मतलब अमेरिका अकेला नहीं है। इन उद्देश्यों को हासिल करने का एक तरीका दूसरे देशों के साथ सहयोग भी है। हम दुनिया में उन रिश्तों को मजबूत करना चाहते हैं जो हमारे लिए अहम हैं, और भारत उनमें से एक है।

भारत का उभार 21वीं सदी की सबसे बड़ी कहानी

भारत की वैश्विक भूमिका पर जोरलैंडाउ ने भारत के उभार को 21वीं सदी की सबसे बड़ी कहानी करार दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को आकार देने में भारत की भूमिका निर्णायक होगी। भारत की जनसंख्या, आर्थिक क्षमता और संसाधन इसे दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में से एक बनाते हैं। यह सदी भारत की होगी।

व्यापार समझौता 'फिनिश लाइन' के करीब

लैंडाउ ने खुलासा किया कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और “फिनिश लाइन” के बहुत करीब है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को “लगभग असीमित संभावनाओं” तक ले जा सकता है। बता दें फरवरी 2026 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए समझौते के बाद एक अंतरिम फ्रेमवर्क की घोषणा हुई थी, जिसमें पारस्परिक टैरिफ में कमी (जैसे भारतीय सामानों पर 50% से घटाकर 18% तक), बाजार पहुंच बढ़ाने और व्यापक BTA पर आगे की बातचीत शामिल है। लैंडाउ ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए परस्पर लाभकारी बताया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यह पारस्परिकता और निष्पक्षता पर आधारित होगा।

ऊर्जा और रणनीतिक आयाम

रायसीना डायलॉग में लैंडाउ ने मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों पर भी बात की और अमेरिका को वैकल्पिक स्रोत के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में गहन सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है- यह सब “हमारे हित में और भारत के हित में” है। यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों में एक संतुलित लेकिन मजबूत साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है, जहां दोनों पक्ष आर्थिक लाभ के साथ-साथ रणनीतिक विश्वास भी बढ़ाना चाहते हैं।

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