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क्रिप्टो का ‘गुप्त रास्ता’: कैसे बिटकॉइन माइनिंग के जरिए ईरान प्रतिबंधों के बावजूद विदेशों में कर रहा भुगतान

 Published : Mar 06, 2026 10:45 am IST,  Updated : Mar 06, 2026 10:45 am IST

बिटकॉइन डेटा सेंटर NRG Bloom के संचालक माकर वोल्सी कहते हैं, बिटकॉइन को इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन राष्ट्रपति है या कौन-सा देश प्रतिबंधों में है, यह बस चलता रहता है।

ईरान पर हुए एक मिसाइल हमले के बाद का दृश्य।- India TV Hindi
ईरान पर हुए एक मिसाइल हमले के बाद का दृश्य। Image Source : AFP

कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और कमजोर होती मुद्रा के बावजूद ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशीनरी, ईंधन और सैन्य उपकरणों की खरीद जारी रखे हुए है। विश्लेषकों के मुताबिक इसके पीछे एक बड़ा कारण बिटकॉइन माइनिंग है, जिसने ईरान को पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर एक वैकल्पिक भुगतान नेटवर्क दे दिया है। ईरान ने वर्ष 2019 में बिटकॉइन माइनिंग को कानूनी मान्यता दी थी। उस समय इसे एक आर्थिक प्रयोग के तौर पर पेश किया गया था। लेकिन अब विशेषज्ञों का कहना है कि यह धीरे-धीरे प्रतिबंधों से बचने वाले भुगतान नेटवर्क में बदल गया है।

विदेशों में भुगतान के लिए इस्तेमाल

माइनिंग के जरिए तैयार होने वाले बिटकॉइन को सीधे सरकारी नियंत्रित वॉलेट में ट्रांसफर किया जा सकता है और फिर इन्हें विदेशों में भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम का सहारा नहीं लेना पड़ता। इस प्रक्रिया में SWIFT ट्रांसफर की जरूरत नहीं होती। कोरेस्पॉन्डेंट बैंकों का इस्तेमाल नहीं होता और अमेरिकी ट्रेजरी की निगरानी से भी काफी हद तक बचा जा सकता है।

कम लागत में माइनिंग, बड़ा मुनाफा

अमेरिका के बिटकॉइन रणनीतिकार जेक पर्सी के अनुसार ईरान में एक बिटकॉइन माइन करने की लागत करीब 1,300 डॉलर है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिटकॉइन की कीमत करीब 73,000 डॉलर के आसपास है। इस तरह प्रति बिटकॉइन लगभग 71,700 डॉलर का संभावित मार्जिन बन जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में इस्तेमाल किया जा सकता है।

ईरान का क्रिप्टो इकोसिस्टम तेजी से बढ़ा

ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनी Chainalysis के अनुमान के मुताबिक 2025 तक ईरान का क्रिप्टो इकोसिस्टम लगभग 7.78 अरब डॉलर तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार 2025 के अंत में ईरान में आने वाली क्रिप्टो फंडिंग का आधे से ज्यादा हिस्सा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े वॉलेट एड्रेस से जुड़ा हुआ था। अकेले एक साल में इन पतों के जरिए 3 अरब डॉलर से अधिक का लेनदेन हुआ।

ब्लॉकचेन से मिल रहे नए इंटेलिजेंस संकेत

दिलचस्प बात यह है कि क्रिप्टो लेनदेन पूरी तरह सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर रिकॉर्ड होते हैं। इससे खुफिया एजेंसियों को नई तरह की जानकारी भी मिल रही है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, जब 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले हुए, तो ब्लॉकचेन विश्लेषकों ने पारंपरिक खुफिया स्रोतों से पहले ही असामान्य वित्तीय गतिविधियां नोटिस कर ली थीं। ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज Nobitex से अचानक बड़ी मात्रा में फंड निकलने लगे। 28 फरवरी से 2 मार्च के बीच लगभग 10.3 मिलियन डॉलर एक्सचेंज से बाहर ट्रांसफर हुए और प्रति घंटे का ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 2026 के औसत से 873% ज्यादा हो गया।

केवल ईरान ही नहीं, दूसरे देश भी इस्तेमाल कर रहे तरीका

क्रिप्टो विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अवैध या प्रतिबंधित क्रिप्टो पतों को करीब 154 अरब डॉलर प्राप्त हुए। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा प्रतिबंधित संस्थाओं को मिले फंड का था। रूस ने प्रतिबंधों से बचने के लिए एक स्टेबलकॉइन के जरिए लगभग 93 अरब डॉलर का लेनदेन किया। उत्तर कोरिया के हैकरों ने एक क्रिप्टो एक्सचेंज पर हमले में 1.5 अरब डॉलर चुरा लिए और इसे सीधे अपने हथियार कार्यक्रम में लगाया। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर आधारित वैश्विक प्रतिबंध प्रणाली में ब्लॉकचेन एक नई चुनौती बनकर उभरा है, जिसका इस्तेमाल कई देश अलग-अलग तरीकों से कर रहे हैं। क्रिप्टो उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक तकनीक की प्रकृति ही ऐसी है कि यह राजनीतिक सीमाओं से परे काम करती है।

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