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क्या है Positive Payment System जो खाताधारकों की सारी परेशानियों को करेगा दूर

 Published : Aug 04, 2022 10:52 am IST,  Updated : Aug 04, 2022 12:07 pm IST

Positive Payment System: देश के सभी बड़े बैंक अपने यहां एक अगस्त से ही Positive Payment System को लागू कर दिए हैं। जानिए कैसे करता है काम।

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क्या है Positive Payment System और कैसे करेगा काम Image Source : INDIA TV

Highlights

  • 1 अगस्त से ही शुरू हो गए हैं Positive Payment System
  • आरबीआई ने 2020 में की थी इसकी शुरुआत
  • 50 हजार से अधिक वाले चेक पर करता है काम

Positive Payment System: देश के सभी बड़े बैंक अपने यहां एक अगस्त से ही Positive Payment System को लागू कर दिए हैं। इन्होनें अपने ग्राहकों से कहा है कि वो जल्द से जल्द PPS के तहत रजिस्ट्रेशन करा लें। इसके लिए बैंक के तरफ से नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। अगर आपने अभी तक अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो आपको चेक क्लियर कराने में दिक्कत उठानी पड़ सकती है। आज हम आपको आगे बताएंगे कि क्या है Positive Payment System और कैसे काम करता है?

क्या है Positive Payment System?

इसकी शुरुआत 2020 में की गई थी। आरबीआई की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, Positive Payment System का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है जब आपका अमाउंट 50 हजार से ज्यादा हो। लेकिन बैंको के पास ये सुविधा होती है कि अगर वो चाहे तो 5 लाख तक की राशि पर इस सिस्टम का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। लेकिन पांच लाख से अधिक रुपये होने पर इस सिस्टम को अनिवार्य रूप से लागू करना होता है। चेक जारी करने वाले व्यक्ति अगर मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग, SMS और ATM के माध्यम से बेसिक जानकारी दी जाती है, ताकि ये वेरिफाई किया जा सके कि दी गई जानकारी सही है। उसके बाद उसे Cheque Truncation System यानि CTS के द्वारा क्रॉसचेक किया जाता है। जानकारी वेरिफाई होने के बाद ही चेक की राशि का भुगतान होता है। 

इसे National Payments Corporation of India यानि NPCI ने विकसित किया है। उसी के देखरेख में ये काम भी करता है। देश के अधिकतर बैंक इस सिस्टम को लागू कर चुके हैं। 

इससे क्या है फायदा?

Positive Payment System के शुरू हो जाने से धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। कोई किसी व्यक्ति के अकाउंट से छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा। खाताधारक का पैसा सुरक्षित रहेगा। साथ ही इसमें वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन अलग-अलग स्तर पर होने से चेक ट्रांजैक्शन की सुविधा और सुरक्षा और ज्यादा बढ़ जाएगी। रिजर्व बैंक इसे बहुत पहले लागू कर दिया था, लेकिन बैंको को इसके लिए समय दिया था। उसके बाद अगस्त के शुरुआत से बैंक भी इसे अनिवार्य कर दिए हैं।

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