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सस्ते घरों से मुंह मोड़ कर लग्जरी घर बनाने में डेवलपर्स की क्यों बढ़ी दिलचस्पी, जानें इस सवाल का जवाब

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Jul 20, 2025 05:56 pm IST,  Updated : Jul 20, 2025 05:56 pm IST

मध्यम आय और किफायती वर्ग के मामले में नई परियोजनाएं कम पेश हो रही हैं। साथ ही इस खंड में पहले के बचे फ्लैट की कमी के कारण आपूर्ति कम है।

Real Estate - India TV Hindi
रियल एस्टेट Image Source : FILE

देश में बहुत सारे लोग चाहकर भी अपने घर का सपना पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह, उनके बजट में घर उपलब्ध नहीं होना है। इसके बावजूद सस्ते घर डेवलपर्स नहीं बना रहे हैं। देशभर के नामी डेवलपर्स का फोकस लग्जरी यानी करोड़ों की कीमत के घर बनाने पर है। अगर आप भी एक होम बायर्स और इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं तो चलिए हम आपको बताते हैं इसका जवाब। 

नारेडको के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी हरि बाबू ने कहा कि पिछली कुछ तिमाहियों से कंपनियों का रुझान लग्जरी और प्रीमियम मकानों की ओर बढ़ा है। इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहला कारण है कि महामारी के बाद लग्जरी श्रेणी के घरों की मांग तेजी से बढ़ी है। मकान खरीदार विशेष रूप से उच्च आय वाले लोग (एचएनआई), प्रवासी भारतीय और महानगरों में काम करने वाले पेशेवर अब बड़े घरों के साथ बेहतर सुविधाओं और जीवनशैली की तलाश में हैं। लोगों की खरीद क्षमता बढ़ने से भी इस खंड में मांग बढ़ी है। दूसरा, लग्जरी मकानों के मामले में कंपनियों को अच्छा मार्जिन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी तरफ मध्यम आय और किफायती खंड में कीमतें संवेदनशील बनी हुई हैं। भूमि की ऊंची लागत के कारण किफायती श्रेणी के मकान निजी डेवलपर के लिए कम आकर्षक हो गए हैं। इसलिए वे सस्ते घर नहीं बना रहे हैं। 

50 लाख से 80 लाख के घर की सबसे अधिक मांग 

यह पूछे जाने पर कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा मध्यम आय वर्ग और किफायती आवास यानी 50 लाख रुपये से 80 लाख रुपये के बीच के घर चाहता है, लेकिन इस श्रेणी में आने वाली परियोजनाओं की संख्या पर्याप्त नहीं है, हरि बाबू ने कहा कि हां, यह सही है। देश में एक बड़ा तबका खासकर 50 लाख रुपये से 80 लाख रुपये के दायरे में, घर खरीदने की इच्छा रखता है। यह श्रेणी कामकाजी मध्यम वर्ग की आवास आवश्यकताओं को पूरा करती है, जो हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हालांकि, मध्यम आय और किफायती श्रेणी में वर्तमान आपूर्ति, मांग को पूरा नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि इसके कारणों में भूमि, निर्माण सामग्री और श्रम समेत कच्चे माल की लागत का अधिक होना है। इसकी वजह से कंपनियों के लिए एक मूल्य सीमा में कार्य करना मुश्किल हो रहा है।

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