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जल्द खुलेगा निवेश का नया मौका! Cotec Healthcare का आएगा IPO, सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर्स जमा, जानें डिटेल

 Published : Sep 11, 2025 11:03 am IST,  Updated : Sep 11, 2025 11:03 am IST

कंपनी इस आईपीओ के जरिये ₹295 करोड़ तक की पूंजी जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। कोटेक हेल्थकेयर भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग में एक प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (सीडीएमओ) है।

कोटेक हेल्थकेयर लिमिटेड के IPO में दो हिस्से शामिल हैं।- India TV Hindi
कोटेक हेल्थकेयर लिमिटेड के IPO में दो हिस्से शामिल हैं। Image Source : PIXABAY

फार्मास्युटिकल कंपनी कोटेक हेल्थकेयर लिमिटेड ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल कर दिया है। इस आईपीओ के जरिये कंपनी ₹295 करोड़ तक की पूंजी जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इस IPO में दो हिस्से शामिल हैं। एक, ₹226.25 करोड़ के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। यह फ्रेश इश्यू होगा। और दूसरा, प्रमोटर हर्ष तिवारी और वंदना तिवारी द्वारा 60 लाख शेयरों की बिक्री की जाएगी। इसमें दोनों प्रमोटर 30-30 लाख शेयर बेचेंगे। यह ऑफर फॉर सेल होगा। 

जुटाए गए फंड का उपयोग

कोटेक हेल्थकेयर लिमिटेड इस IPO से प्राप्त ₹226.25 करोड़ का उपयोग एक नई निर्माण परियोजना शुरू करने के लिए करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और नए उत्पादों का निर्माण शुरू करना है। इसके अलावा, कुछ राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए भी किया जाएगा। इस पब्लिक इश्यू के लिए पैंटोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स को लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।

कोटेक हेल्थकेयर को जान लीजिए

कोटेक हेल्थकेयर भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग में एक प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (सीडीएमओ) है। यह कई तरह की सेवाएं प्रदान करती है, जिनमें फॉर्मूलेशन डेवलपमेंट, लोन लाइसेंसिंग, ऑफ-पेटेंट उत्पादों का कमर्शियल मैन्युफैक्चरिंग और जटिल डिलीवरी फॉर्म्स (जैसे सस्टेन्ड और मोडिफाइड रिलीज़ फॉर्म्स) का निर्माण शामिल है। कंपनी के ग्राहक संस्थागत और निजी दोनों क्षेत्रों से आते हैं।

भारतीय फार्मा बाजार की स्थिति

एफएंडएस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय फार्मास्युटिकल बाज़ार (आईपीएम) लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019 में इस बाज़ार का मूल्य 16.6 अरब डॉलर था। अनुमान है कि यह 2029 तक 38.3 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। इस वृद्धि की मुख्य वजह जेनेरिक दवाएं, ओवर-द-काउंटर (ओवर द काउंटर) उत्पाद, बल्क ड्रग्स और मजबूत कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर हैं। भारत, उत्पादन के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है।

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