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NSE ने रचा इतिहास: गोल्ड मार्केट में नई क्रांति, अब डिजिटल फॉर्म में ट्रेड होगा फिजिकल सोना

 Published : May 04, 2026 08:05 pm IST,  Updated : May 04, 2026 08:06 pm IST

NSE का EGR फ्रेमवर्क फिजिकल और डिजिटल दुनिया का एक बेहतरीन संगम है। तय गुणवत्ता, आसान ट्रांसफर और डीमैट होल्डिंग जैसी सुविधाओं के साथ, EGR आने वाले समय में भारतीयों के लिए सोने में निवेश करने का सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद तरीका बनने वाला है।

EGR एक प्रकार की डिजिटल सिक्योरिटी है, जो सीधे तौर पर फिजिकल गोल्ड के मालिकाना हक को दर्शाती है।- India TV Hindi
EGR एक प्रकार की डिजिटल सिक्योरिटी है, जो सीधे तौर पर फिजिकल गोल्ड के मालिकाना हक को दर्शाती है। Image Source : NSE वेबसाइट

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने आज औपचारिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) सेगमेंट लॉन्च कर दिया है। यह क्रांतिकारी पहल भारत के विशाल लेकिन असंगठित स्वर्ण बाजार को एक सुरक्षित, पारदर्शी और रेगुलेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले आएगी। यह कदम सदियों पुरानी 'फिजिकल गोल्ड' परंपरा और आधुनिक 'फाइनेंशियल मार्केट' के बीच की दूरी को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

क्या है EGR और कैसे करता है काम?

EGR एक प्रकार की डिजिटल सिक्योरिटी है, जो सीधे तौर पर फिजिकल गोल्ड के मालिकाना हक को दर्शाती है। यह सोना SEBI द्वारा मान्यता प्राप्त वॉल्ट्स में पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है और डिपॉजिटरी के जरिए आपके डीमैट खाते में इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रहता है। हर रिसीट शुद्ध सोने से जुड़ी होती है, जिसे स्टॉक एक्सचेंज पर शेयरों की तरह आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है।

1 किलो सोने का सफल 'डीमटेरियलाइजेशन'

लॉन्च के अवसर पर, NSE ने सफलतापूर्वक एक गोल्ड बार (1000 ग्राम) को इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) में बदलकर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। यह प्रयोग साबित करता है कि फिजिकल सोने को सुरक्षित रूप से डिजिटल इंस्ट्रूमेंट में बदला जा सकता है और वह पूरी तरह से डिलीवरी-आधारित ट्रेडिंग के लिए तैयार है।

निवेशकों और बाजार को क्या होगा फायदा?

समान कीमत: देश भर में बिखरे हुए अलग-अलग बेंचमार्क्स पर निर्भरता कम होगी और पारदर्शी मूल्य निर्धारण संभव होगा।

छोटे निवेश का मौका: निवेशक अब सोने के छोटे-छोटे हिस्सों में भी निवेश कर सकेंगे, जिससे आम लोगों के लिए गोल्ड मार्केट तक पहुंच आसान होगी।
उच्च लिक्विडिटी: डिजिटल फॉर्म में होने के कारण इसे कभी भी कैश में बदला जा सकेगा, ठीक वैसे ही जैसे आप शेयर बेचते हैं।
संस्थागत भरोसा: ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और ट्रेडर्स के बीच लेनदेन का भरोसा बढ़ेगा क्योंकि पूरी प्रक्रिया रेगुलेटेड फ्रेमवर्क के तहत होगी।

लीडरशिप की प्रतिक्रिया

इस मौके पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए श्रीराम कृष्णन (सीबीडीओ, एनएसई) ने कहा कि EGR की शुरुआत इस बात का संकेत है कि भारत अपने सबसे पसंदीदा एसेट 'सोने' के साथ अब एक आधुनिक तरीके से जुड़ेगा। हमारा लक्ष्य गोल्ड निवेश को आसान, सुरक्षित और डिजिटल बनाना है ताकि इसे कैपिटल मार्केट के एक अभिन्न हिस्से के रूप में स्थापित किया जा सके। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ज्यादा से ज्यादा लोग औपचारिक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बन सकेंगे।

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