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वित्‍तीय योजनाओं में जरूर बनाए नॉमिनी, आपकी संपत्ति को रखता है सुरक्षित

 Written By: Shubham Shankdhar
 Published : Nov 05, 2015 07:19 am IST,  Updated : Nov 05, 2015 04:48 pm IST

किसी निवेश योजना में नॉमिनी कानूनी तौर पर एक ट्रस्टी होता है। ऐसे में किसी भी योजना में नॉमिनी बनाना बहुत जरूरी है।

वित्‍तीय योजनाओं में जरूर बनाए नॉमिनी, आपकी संपत्ति को रखता है सुरक्षित- India TV Hindi
वित्‍तीय योजनाओं में जरूर बनाए नॉमिनी, आपकी संपत्ति को रखता है सुरक्षित

नई दिल्‍ली। किसी निवेश योजना में नॉमिनी कानूनी तौर पर एक ट्रस्टी होता है। वह आपकी संपत्ति को तब तक संभाल कर रखता है, जब तक कोई कानूनी वारिस उस संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा नहीं करता। ऐसे में किसी भी योजना में नॉमिनी बनाना बहुत जरूरी है। आमतौर पर हम बैंक खाता, निवेश, प्रॉपर्टी और जीवन बीमा जैसे सभी वित्तीय उत्पादों में नॉमिनी बनाते हैं। बच्चों के लिए भी जो निवेश करते हैं उसमें हम उनको ही नॉमिनी बना देते हैं। इसके पीछे यही धारणा होती है कि हमारे बाद सब कुछ नॉमिनी को मिल जाएगा। लेकिन कानून की बात करें तो इसमें नॉमिनी का मतलब कुछ और होता है, जो इस इस धारणा को गलत सिद्ध करता है। आइए जानें कि नॉमिनी का किसी वित्तीय उत्पाद में आखिर क्या महत्व होता है।

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क्या है नॉमिनी

कानूनी तौर पर नॉमिनी एक ट्रस्टी होता है। यानी कि वह आपकी संपत्ति को तब तक संभाल कर रखता है, जब तक कोई कानूनी तौर पर उसका वारिस मालिकाना हक के लिए क्लेम नहीं करता। क्लेम करने पर नॉमिनी को वह संपत्ति उसको देनी पड़ती है। शेयरों को छोड़कर यह व्यवस्था सभी वित्तीय उत्पादों पर लागू होती है।

क्‍या होता है वारिस

कानूनन आपकी संपत्ति का हक आपके वारिस को जाता है। अगर आपने कोई  वसीयत लिखी हुई है तो उसके आधार पर ही आपकी संपत्ति का बंटवारा होता है। अगर आपने वसीयत नहीं लिखी है तब भी वह उत्तराधिकार कानून के तहत आपके परिवार को दी जाती है। यानी दोनों सूरत में नॉमिनी सिर्फ  एक ट्रस्टी का कार्य निभाता है।

क्या हैं दायित्व

नॉमिनी के विभिन्न वित्तीय उत्पादों में अलग-अलग दायित्व होते हैं।

बचत खाता: सबसे पहले आपका बचत खाता आता है। आप अपने सभी बैंक खातों में नॉमिनी बना सकते हैं जिसका आपकी मृत्यु के पश्चात इन खातों से जुड़े सभी तरह के अधिकार मिल जाते हैं लेकिन वह सिर्फ  एक सरंक्षक ही होता है।  इसको अंत में क्लेम करने की सूरत में कानूनन वारिस को देना पड़ता है।

पीपीएफ: निवेश के लिए यह एक महत्वपूर्ण उत्पाद है। इसमें नॉमिनी नियुक्त होना बहुत जरूरी होता है। कानून के तहत अगर आपने कोई नॉमिनी नियुक्त नहीं किया है और वसीयत नहीं बनाई है तो तो वारिस को अधिकतम एक लाख रुपए ही मिल पाते हैं। इसमें जमा पूरी राशि पाने के लिए उसे लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। इसे पूरा करने में बरसों भी लग सकते हैं। अगर नॉमिनी नियुक्त किया हुआ है तो पीपीएफ खाते में जमा पूरी रकम उसे मिल जाती  है। यदि इसका वारिश कोई अलग है तो वह इसे आसानी से हासिल कर सकता है।

जीवन बीमा: यहां आप एक से ज्यादा नॉमिनी बना सकते हैं और उनको कितना हिस्सा मिलना चाहिए यह भी तय कर सकते हैं। लेकिन इसमें पहला नॉमिनी आपके  परिवार का ही सदस्य होना चाहिए। इसका मुख्य कारण यह है कि उसमें बीमा राशि लेने की दिलचस्पी होगी। कोई दोस्त या ऐसा व्यक्ति जिसमें आपका बीमा लेने में कोई दिलचस्पी  नहीं है, उसको पहला नॉमिनी नहीं बनाया जाना चांिहए। यदि बना भी रहे हैं तो पूरी तरह से जांच-परख कर ही बनाएं। यदि आप इसमें लापरवाही बरतते हैं किसी अनहोनी की स्थिति में आपके परिवार के समक्ष मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

म्यूचुअल फंड: इसमें निवेश के दौरान आप तीन नॉमिनी तक घोषित कर सकते हैं। आमतौर पर निवेश करते वक्त ही आप इस बारे में फैसला कर सकते हैं। यहां पर एक नाबालिग को भी नॉमिनी बनाया जा सकता है लेकिन उसके लिए एक संरक्षक का होना बहुत जरूरी है।

शेयर: स्टाक मार्केट में नॉमिनी का एक कानून है। इसके तहत अगर आपने कोई वसीयत नहीं लिखी है तो नॉमिनी का ही आपके शेयरों पर कानूनन अधिकार हो जाता है। यहां पर उत्तराधिकार कानून भी लागू नहीं होता। यदि आपने वसीयत लिखी है तो फिर शेयरों का आवंटन उसी के आधार पर किया जाता है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो शेयर को छोड़ कर सभी में एक ही कानून है कि नॉमिनी एक ट्रस्टी बनकर सिर्फ आपकी संपत्ति को संभाल कर रखता। संपत्ति पर असली हक आपके कानूनी वारिस का ही होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नॉमिनी नियुक्त करने का फायदा क्या है?आपकी संपत्ति आपके बाद आपके परिवार को आसानी से मिल सके इसके लिए नॉमिनेशन की जरूरत पड़ती है। नॉमिनेशन न होने की सूरत में आपके परिवार को बहुत से दस्तावेज जुटाने की जरूरत पड़ती है। यह सिद्ध करने के लिए कि वह कानूनी वारिस है, इसके लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जरूरी होता है। लेकिन इसको हासिल करने के लिए अदालत के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसमें कई बार लंबा समय भी लग जाता है। ऐसे में आपका परिवार उस संपत्ति से तब तक वंचित रहता है जब तक उसे प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता। इन समस्याओं से बचने के लिए ही नॉमिनी नियुक्त किया जाता है।

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