कभी-कभी जिंदगी किसी इंसान की परीक्षा इतनी कठिन ले लेती है कि हर बार हार के बाद आगे बढ़ना नामुमकिन सा लगने लगता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हर नाकामी को आखिरी नहीं, अगली सीढ़ी मानते हैं। ऐसी ही एक इंस्पायरिंग कहानी ShareChat के को-फाउंडर अंकुश सचदेवा की है।
नमूने लेकर बाजार गईं। मार्केटिंग का कोई तजुर्बा था नहीं। कुछ कारोबारियों से बात कीं। बात बनीं नहीं तो घर लौट आईं। आकर इनपुट कॉस्ट और प्रति डब्बा अपना लाभ निकालकर फिर बाजार गईं। लोगों ने बताया हमें तो इससे सस्ता मिलता है।
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